Shimla News: हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता अब काफी धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होने से वर्षा में कमी आई है। राहत की बात यह है कि आगामी सप्ताह के दौरान राज्य में किसी भी भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
बीते चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि, बारिश कम होने के बावजूद भूस्खलन की वजह से पूरे राज्य में कुल 85 सड़कें अभी भी पूरी तरह बंद हैं। इससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है और लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले चौबीस घंटों में धर्मशाला में सबसे अधिक 30.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा बिलासपुर के बीबीएमबी में 21.4 मिमी, ऊना के रायपुर मैदान में 18 मिमी, नाहन में 14 मिमी, चंबा के जोत में 12.6 मिमी और पालमपुर में 12 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मौसम में आए इस बदलाव से लोगों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।
प्रदेश में एक जून से पांच सितंबर तक कुल 584.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य बारिश 643.3 मिलीमीटर से लगभग 9 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन की घटनाओं से बुनियादी ढांचे को लगातार भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे सरकारी विभागों और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं अभी भी पूरी तरह बनी हुई हैं।
राज्यभर में वर्तमान में 85 सड़कें पूरी तरह बाधित हैं। इनमें मंडी जिले में 45, कुल्लू में 15, कांगड़ा में 8, सोलन में 6, सिरमौर व ऊना में 4-4, शिमला में 2 और लाहुल-स्पीति में 1 सड़क बंद है। इसके अलावा राज्य में 29 बिजली ट्रांसफार्मर और 51 पेयजल योजनाएं भी ठप पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन काफी अस्त-व्यस्त हो गया है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 30 जून से 5 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक मानसून से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने से 110 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सड़क हादसों में भी 160 लोगों की जान गई है। लोक निर्माण, जल शक्ति, बिजली बोर्ड और निजी संपत्ति को कुल 1242.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।