हिमाचल प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: राजस्थान को बिजली बेचने से मिलेगा 400 करोड़ का राजस्व, मुख्यमंत्री सुक्खू ने गिनाईं उपलब्धियां

Share

- Advertisement -

Shimla News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार ने राजस्थान को 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने पर सहमति जताई है, जिससे अगले चार महीनों में 400 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को एक बयान में कहा कि राज्य सरकार अपनी संपत्तियों और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर रही है। इसी कड़ी में राजस्थान को बिजली बेचने का निर्णय लिया गया है, जिससे चार महीनों के भीतर हिमाचल प्रदेश को 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व हासिल होगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार भ्रष्टाचार के सभी रास्तों को पूरी तरह बंद कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

वाइल्डफ्लावर हॉल और बैरा-सिउल परियोजना पर उठाए गए कदम

मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला स्थित चर्चित वाइल्डफ्लावर हॉल का मामला साल 2003 से लंबित चल रहा था। राज्य सरकार ने कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से इस मामले को मजबूती से आगे बढ़ाया, जिसके अनुकूल परिणाम मिलने से राज्य को 401 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। अब इस संपत्ति की ई-नीलामी के जरिए सरकार को हर साल लगभग 37 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। पिछले 23 वर्षों से इस संपत्ति से राज्य को कोई आय नहीं मिल रही थी, और अब इससे प्राप्त होने वाले धन को जन कल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जाएगा।

इसके अलावा, सरकार ने केंद्र के समक्ष मजबूती से पक्ष रखते हुए 180 मेगावाट की बैरा-सिउल जलविद्युत परियोजना के 44 साल पूरे होने के बाद हिमाचल की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का मामला उठाया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि को बढ़ावा

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है। सरकार किसानों से कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलो, गेहूं 80 रुपये प्रति किलो और मक्का 50 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद रही है। इसके अलावा गाय का दूध 61 रुपये और भैंस का दूध 71 रुपये प्रति लीटर के समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है, जो पहले की दरों से लगभग दोगुना है।

आदिवासी क्षेत्रों का विकास और विद्युतीकरण

सरकार ने राज्य की सभी स्थायी और मौसमी आदिवासी बस्तियों में शत-प्रतिशत (100%) विद्युतीकरण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में आदिवासी इलाकों में शिक्षा के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई है। इन क्षेत्रों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ राजीव गांधी सरकारी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल, सीबीएसई से संबद्ध स्कूल और उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने निर्वाचन क्षेत्रों की विभिन्न पंचायतों में सड़कों के निर्माण के लिए भी आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

Read more

Related News