Shimla News: हिमाचल प्रदेश की सात प्रमुख प्रदूषित नदियों में सुधार को लेकर केंद्र सरकार अब कड़ा हिसाब लेने जा रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से जुड़े एक अहम मामले में केंद्रीय निगरानी समिति की 22वीं बैठक 9 अक्टूबर को आयोजित होगी। इस बैठक में प्रदेश के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
सात नदी खंडों के पुनर्जीवन की प्रगति का ब्योरा
राज्य के पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जल शक्ति विभाग के अधिकारी सुबह 11 बजे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रिपोर्ट पेश करेंगे। एनजीटी द्वारा चिह्नित इन जलस्रोतों में सुखाना, मारकंडा, सिरसा, अश्वनी, ब्यास, गिरि और पब्बर नदियां शामिल हैं। वर्ष 2018 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन हिस्सों की पहचान की थी।
बैठक में राज्य सरकार को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, गंदे पानी की रोकथाम, औद्योगिक कचरे पर नियंत्रण और जल गुणवत्ता सुधार का ब्योरा देना होगा। केंद्रीय निगरानी समिति राज्यों द्वारा बनाई गई कार्ययोजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करती है, ताकि नदियों को तय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्वच्छ बनाया जा सके।
नियमित निगरानी और जल गुणवत्ता में वास्तविक सुधार की जांच
इस पूरी प्रक्रिया की मासिक और तिमाही प्रगति रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज की जाती हैं। इससे पहले जनवरी 2024 में समिति की 18वीं बैठक में भी हिमाचल सरकार से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट मांगी गई थी और उसकी प्रति मुख्य सचिव को भेजी गई थी।
अब होने वाली इस 22वीं उच्चस्तरीय बैठक में यह परखा जाएगा कि पिछले वर्षों में उठाए गए कदमों का नदियों के पानी पर क्या वास्तविक असर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में प्रदूषण स्तर अधिक दर्ज हुआ था, वहां सुधार के दावों और तय मानकों की जमीनी हकीकत का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाएगा।