Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज चुनाव लड़ने वाले अवैध कब्जाधारियों पर कानूनी शिकंजा कस दिया है। नए संशोधन के तहत परिवार में सरकारी जमीन पर कब्जा होने पर अब पुत्र-वधू भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। सरकार ने कानून की खामी को दूर कर नया प्रावधान लागू कर दिया है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। पूर्व में कब्जाधारी खुद अयोग्य होने पर अपनी बहुओं को चुनावी मैदान में उतार देते थे। बहू भी परिवार की लाभार्थी होती है, इसलिए यह कड़ा फैसला लिया गया।
पुराने कानून की खामी दूर कर लागू किया नया नियम
साल 1994 के पुराने कानून में परिवार की परिभाषा में बहू शामिल नहीं थी। इसमें केवल दादा, दादी, माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा और अविवाहित बेटी का नाम था। राज्य सरकार ने छह मई 2026 को इस संबंध में अध्यादेश जारी किया था। अब विधानसभा में पारित होने के बाद नया कानून उसी तारीख से प्रभावी होगा।
नए नियमों के अनुसार अतिक्रमणकारी की परिभाषा का दायरा काफी बढ़ गया है। यदि प्रत्याशी या परिवार का कोई भी सदस्य भूमि अतिक्रमण का दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे लोग सरकारी जमीन खाली करने या बेदखल होने की तारीख से लेकर छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
इन गंभीर मामलों में भी रद्द हो जाएगी चुनावी उम्मीदवारी
पंचायती राज अधिनियम की धारा 122 के तहत अन्य मामलों में भी उम्मीदवारी रद्द होगी। एनडीपीएस एक्ट के तहत अदालत में आरोप विचाराधीन होने पर व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेगा। पंचायत या जिला परिषद का कोई भी टैक्स अथवा बकाया लंबित होने की स्थिति में भी पर्चा खारिज कर दिया जाएगा।
पंचायत या सरकारी उपक्रमों में नियमित, पार्ट-टाइम, दिहाड़ी अथवा ठेके पर कार्यरत कर्मचारी चुनाव के पात्र नहीं होंगे। नामांकन पत्र में गलत जानकारी देने या चुनावी अपराध में सजा होने पर भी छह साल की रोक रहेगी। प्रत्याशी की अयोग्यता पर अंतिम फैसला राज्य निर्वाचन आयोग की सलाह से अधिकृत अधिकारी करेगा।