New Delhi News: अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखों के कमर्शियल प्रोडक्शन को लेकर दो प्रमुख सरकारी संस्थाओं के बीच मतभेद सामने आए हैं। सीएसआईआर-नीरी द्वारा नए फॉर्मूले को मंजूरी देने और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की आपत्ति के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से टेस्ट कराने की बात कही है।
अदालत में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जानकारी दी कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत के बाद नई दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई में नए सिरे से परीक्षण कराएगी। इसका मुख्य उद्देश्य पटाखों में कम मात्रा में बेरियम के इस्तेमाल से पर्यावरण पर पड़ने वाले वास्तविक असर का निष्पक्ष आकलन करना है।
सीएसआईआर-नीरी के फॉर्मूले पर सीपीसीबी ने उठाए कड़े सवाल
सीएसआईआर-नीरी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि नए फॉर्मूले से पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन में 45 से 60 फीसदी तक की कमी आई है। नीरी ने रोशनी वाले पटाखों के साथ-साथ लड़ी वाले पटाखों के निर्माण का भी सुझाव दिया। संस्थान के अनुसार इस फॉर्मूले से ठोस कचरे में भी 32 फीसदी कमी दर्ज की गई है।
दूसरी तरफ सीपीसीबी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट 2018 में ही पटाखों में बेरियम सॉल्ट के इस्तेमाल पर साफ रोक लगा चुका है। ऐसे में बेरियम युक्त फॉर्मूले की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि वह इस तकनीकी मुद्दे पर स्वतंत्र विशेषज्ञों से उचित परामर्श ले।