New Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने तीन दशक पुराने लोन मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने केस के अंतिम जीवित आरोपी बैंक मैनेजर को बरी कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने बैंक द्वारा नीलामी से वसूली गई अतिरिक्त रकम ब्याज सहित मृतक आरोपियों के कानूनी वारिसों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
साल 1991 के इस मामले में दो अन्य आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी थी। बैंक ने 50 लाख रुपये का कर्ज वसूलने के लिए साल 2010 में दोनों की संपत्तियां नीलाम की थीं। इस नीलामी से बैंक को करीब 3.6 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन कर्ज चुकता होने के बाद बची रकम परिजनों को नहीं लौटाई गई।
अदालत ने बैंक की कार्यप्रणाली पर जताई गहरी नाराजगी
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बैंक के रवैये पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कर्ज वसूली के बाद बचा अतिरिक्त पैसा सालों तक बैंक के पास दबा रहा। बैंक ने मृतकों के परिजनों का पता लगाकर उन्हें उनका हक का पैसा लौटाने की कोई कोशिश नहीं की, जो बेहद चौंकाने वाला है।
शीर्ष अदालत ने इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा के प्रबंधक को नीलामी और संपत्ति के टाइटल डीड से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि भले ही आपराधिक मामला खत्म हो चुका है, लेकिन वारिसों को उनका अतिरिक्त पैसा और 15 साल का चक्रवृद्धि ब्याज दिलाने के लिए अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।