SHIMLA NEWS: हिमाचल प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में 6,297 नर्सरी टीचर ट्रेनिंग यानी एनटीटी शिक्षकों की भर्ती चार साल बीतने के बाद भी नहीं हो पाई है। करीब 20 हजार अभ्यर्थियों के इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद भर्ती प्रक्रिया अटक गई है। एनटीटी डिप्लोमा की अवधि और मान्यता को लेकर खड़े हुए सवालों ने पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है।
भर्ती का संचालन कर रहे हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम ने शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची मांगी थी। जुलाई 2025 में इंटरव्यू पूरा होने के बाद डॉक्यूमेंट की जांच का काम शुरू हुआ था। इस जांच के दौरान डिप्लोमा की मान्यता को लेकर संदेह पैदा हो गया, जिससे अंतिम मेरिट लिस्ट जारी नहीं की जा सकी।
शिक्षा विभाग ने जनवरी 2026 में भर्ती स्थिति की समीक्षा की थी। जांचे गए करीब 10 हजार आवेदनों में से केवल 87 अभ्यर्थी ही सभी आवश्यक शर्तें पूरी करते पाए गए। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और विभाग ने 6,297 पदों को भरने के लिए अन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई के नियमों के अनुसार एनटीटी पद के लिए दो साल का डिप्लोमा अनिवार्य है। प्रदेश के अधिकतर अभ्यर्थियों के पास केवल एक साल का डिप्लोमा है। इसी वजह से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के चरण में अंतिम चयन सूची नहीं बन पा रही है। अब आगे का रास्ता केंद्र सरकार और एनसीटीई की मंजूरी पर निर्भर है।
सरकार ने एक साल के डिप्लोमा धारकों के लिए ब्रिज कोर्स कराने का विचार किया है। इसके तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों यानी डाइट के जरिए अतिरिक्त ट्रेनिंग देकर इसे दो साल के समकक्ष बनाया जा सकता है। इसके अलावा जेबीटी युवाओं को मौका देने, एनसीटीई से छूट मांगने और दूसरे राज्यों के मॉडल पर भी चर्चा चल रही है।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अप्रैल 2026 में स्पष्ट किया था कि प्री-प्राइमरी भर्ती में एनसीटीई के नियम ही लागू रहेंगे। उन्होंने बताया था कि राज्य स्तर पर नियमों में बदलाव संभव नहीं है और केंद्र को छूट का प्रस्ताव भेजा गया है। फिलहाल केंद्र से मंजूरी न मिलने के कारण 6,297 एनटीटी पदों की भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।