Bilaspur News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ई-चालान एप में हेराफेरी कर निजी यूपीआई पर चालान की रकम लेने वाले बर्खास्त कांस्टेबल की याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की पीठ ने मामले की नए सिरे से जांच कराने का आदेश बरकरार रखा है।
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले से जुड़ा है, जहां आरोपी कांस्टेबल ट्रैफिक क्लर्क के पद पर तैनात था। 3 मई 2023 को ट्रैफिक पुलिस ने शराब पीकर गाड़ी चलाने पर एक वाहन का चालान काटा था। आरोपी ने अधिकारियों की अनुमति के बिना ई-चालान एप के डेटा में मनमर्जी से बदलाव कर दिया।
कॉन्स्टेबल ने अदालती रिकॉर्ड में जुर्माना शून्य और 5,000 रुपये दिखाया, जबकि वाहन चालक से उसके वकील के जरिए 20,000 रुपये अपने निजी गूगल पे खाते में जमा करवा लिए। जांच में पाया गया कि यह राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की गई, जिसके बाद उस पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दिसंबर 2023 में बिलासपुर एसपी ने आरोपी कांस्टेबल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद उसने डीआईजी मंडी के समक्ष अपील की। सुनवाई के दौरान डीआईजी ने पाया कि बर्खास्तगी की प्रक्रिया में पंजाब पुलिस रूल्स के नियम 16.38 का पालन नहीं हुआ था।
डीआईजी ने पहली विभागीय जांच को रद्द कर नियम 16.38 के तहत नए सिरे से जांच का आदेश दिया था। बर्खास्त कर्मचारी ने इस नए आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उसकी दलील थी कि एक बार जांच रद्द होने के बाद दोबारा नई प्रक्रिया शुरू नहीं की जानी चाहिए।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उसकी दलील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि तकनीकी खामी से पुरानी जांच रद्द होने का मतलब क्लीन चिट नहीं है। नियम 16.38 का मकसद ईमानदार अफसरों की रक्षा करना है, न कि भ्रष्ट कर्मचारियों को सजा से बचाना। विभाग को नियमानुसार नई निष्पक्ष जांच का पूरा अधिकार है।
