Shimla News: हिमाचल प्रदेश की एक अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में पत्नी की अपील खारिज कर दी है। 37 साल की पत्नी ने 72 वर्षीय दिव्यांग पति पर घरेलू हिंसा और भरण-पोषण न देने के आरोप लगाए थे। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए राहत दी है।
अदालत ने कहा दिव्यांग व्यक्ति नहीं कर सकता प्रताड़ित
किन्नौर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि एक लकवाग्रस्त और दिव्यांग वरिष्ठ नागरिक किसी स्वस्थ महिला को शारीरिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता है। प्रतिवादी बुजुर्ग हैं और उन्हें लगातार दूसरों की मदद की जरूरत रहती है।
दोनों की शादी साल 2005 में हुई थी। पत्नी का आरोप था कि पति शराब पीकर गाली-गलौज करता था और जान से मारने की धमकी देता था। उसने यह भी दावा किया कि साल 2019 में पति ने झगड़ा करके उस पर हथियार से हमले की कोशिश की और भरण-पोषण देना बंद कर दिया।
पत्नी के दावों को पति और अदालत ने बताया बेबुनियाद
पति ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि पत्नी शादी के डेढ़ साल बाद ही घर छोड़कर चली गई थी। साल 2007 में दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए दाखिल याचिका को कोर्ट ने 9 मई 2008 को मंजूर किया था, लेकिन इसके बाद भी पत्नी वापस नहीं लौटी।
पत्नी ने दलील दी कि पति अर्धसैनिक बल से रिटायर्ड अफसर हैं और उनकी पेंशन 50 हजार रुपये से अधिक है। साथ ही वे बागवानी से भी कमाई करते हैं। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि पत्नी 2019 में पति के साथ रहने का कोई मजबूत सबूत पेश नहीं कर सकी।