Delhi News: दिल्ली की शाहदरा जिला पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने फर्जी मार्कशीट बनाकर बेचने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड शबाब आलम समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से कई जाली मार्कशीट, लैपटॉप और प्रिंटर जैसे उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य आरोपी शबाब आलम पहले हिमाचल प्रदेश में एक संस्थान चलाता था। जब बोर्ड ने उसकी गड़बड़ियों के कारण मान्यता रद्द कर दी, तब उसने दिल्ली-एनसीआर में आकर फर्जी दस्तावेज बनाने का अवैध काम शुरू कर दिया। वह लोगों से दस हजार रुपये लेकर जाली दस्तावेज देता था।
शाहदरा स्पेशल स्टाफ ने गुप्त सूचना पर की कार्रवाई
डीसीपी आरपी मीणा ने बताया कि 30 जून को शाहदरा क्षेत्र में फर्जी मार्कशीट बेचने वाले गैंग की गुप्त जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने जाल बिछाया और एक पुलिसकर्मी को फर्जी छात्र बनाकर नवनीत त्यागी नाम के आरोपी से संपर्क करने भेजा। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए अपनी रणनीति बनाई।
फर्जी ग्राहक बने पुलिसकर्मी ने अपनी तस्वीर और पहचान से जुड़े दस्तावेज नवनीत को भेज दिए। आरोपी ने बीस दिनों के भीतर 12वीं की फर्जी मार्कशीट देने का वादा किया था। 17 जुलाई को पुलिस टीम ने विकास मॉल के पास छापेमारी करके नवनीत को गिरफ्तार कर लिया और उसके पास से जाली कागजात बरामद किए।
पुराने सालों की फर्जी मार्कशीट बेचता था यह गिरोह
नवनीत से पूछताछ के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी शबाब आलम और उसके साथी फरीद को भी धर दबोचा। पूछताछ में शबाब ने बताया कि वह साल 2019 से अब तक लगभग 150 लोगों को फर्जी मार्कशीट बेच चुका है। वह वर्ष 2017 और 2018 की तारीखों वाली बैकडेटेड मार्कशीट बनाकर लोगों को सप्लाई करता था।
यह गिरोह मुख्य रूप से ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जो कम पढ़े-लिखे थे और जिन्हें सुरक्षा गार्ड या ऑफिस सहायक जैसी नौकरियों के लिए 10वीं या 12वीं की मार्कशीट की जरूरत होती थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इसमें बोर्ड का कोई अधिकारी शामिल है या नहीं।