नशा मुक्ति केंद्रों में नशा बिकने पर कसा शिकंजा, केंद्र के मालिक पर दर्ज होगा एनडीपीएस केस, 10 साल की होगी सजा

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। यदि नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार कराने आए लोगों को ही नशा उपलब्ध करवाने का मामला मिला, तो केंद्र मालिक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार को बचत भवन में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। इसमें नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों के संचालकों के साथ चर्चा की गई। उपायुक्त ने कहा कि केंद्रों में नशा बिकने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज होगा। इसमें 10 साल की सजा का प्रावधान है।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा और डॉ. कुशाल वर्मा ने नए नियमों व मानकों की जानकारी दी। नशा मुक्ति केंद्रों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी-1 में एक महीने से कम डिटॉक्सिफिकेशन, श्रेणी-2 में दीर्घकालिक उपचार व काउंसलिंग और श्रेणी-3 में मनोरोग बीमारी का इलाज शामिल है।

नियमों के तहत केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टर और मनोचिकित्सक का होना अनिवार्य किया गया है। आपात स्थिति के लिए 24 घंटे मेडिकल सुविधा होनी चाहिए। इसके अलावा महिला और नाबालिग मरीजों के लिए विशेष डॉक्टरों की ऑन-कॉल सुविधा मिलेगी। हर 30 मरीज पर एक फुल-टाइम काउंसलर रखना अनिवार्य होगा।

उपचार के लिए भर्ती होने से पहले मरीज का रजिस्ट्रेशन कर यूनिक आईडी बनानी होगी। इसके साथ ही मेडिकल जांच और मरीज या उनके परिजनों की लिखित सहमति जरूरी होगी। केंद्रों में डब्ल्यूएचओ के प्रोटोकॉल, साफ-सफाई, लैब सुविधा और मरीजों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

एसएसपी गौरव सिंह ने कहा कि नशा तस्करों पर कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों के सही पुनर्वास पर भी काम जारी है। उपायुक्त ने प्रशासन को निर्देश दिए कि जिला के केंद्र पूरे राज्य के लिए बेहतर उदाहरण बनने चाहिए। प्रशासन अब इन केंद्रों की सख्त निगरानी और गुणवत्ता पर खास ध्यान देगा।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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