Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टाइफस के दो नए मरीज मिले हैं। अस्पताल के अधिकारियों ने सोमवार को पुष्टि करते हुए बताया कि इसके साथ ही इस मौजूदा सीजन में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या तीन तक पहुंच गई है।
आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिनटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने बताया कि सोमवार को नौ ब्लड सैंपल की जांच हुई। इनमें से दो में संक्रमण मिला, जबकि सात सैंपल नेगेटिव आए। मंडी के करसोग तहसील निवासी 24 वर्षीय धनंजय और शिमला के दुर्गापुर निवासी 54 वर्षीय कुंदन लाल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की अपील
डॉ. राव ने जानकारी दी कि अब तक अस्पताल में 38 सैंपल जांचे गए हैं, जिनमें से तीन केस कंफर्म हुए हैं। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। खेतों या झाड़ियों में जाने के बाद ऐसा महसूस होने पर तुरंत टेस्ट करवाएं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने किसानों, मजदूरों और झाड़ियों या जंगलों में काम करने वाले लोगों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने की सलाह दी है। सीधे घास या झाड़ियों पर बैठने से बचें और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। शुरुआती पहचान और सही समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
जानिए आखिर क्या है स्क्रब टाइफस और इसके लक्षण
स्क्रब टाइफस ‘ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी’ नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमित लार्वा माइट्स (चिगर्स) के काटने से इंसानों में फैलता है। ये कीड़े घास के मैदानों और झाड़ियों में मिलते हैं। इसके काटने से तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और त्वचा पर काला पपड़ीदार निशान बन जाता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा और सीलोन में तैनात कई सैनिकों की मौत स्क्रब टाइफस से हुई थी। यह बीमारी ‘त्सुत्सुगामुशी ट्राइंगल’ नाम के एक विशाल इलाके में फैली हुई है। इस क्षेत्र में जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और दक्षिण पूर्व एशियाई देश शामिल हैं। इसका सही समय पर एंटीबायोटिक से इलाज संभव है।