Health News: कैंसर से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधानों को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ (PNAS) में छपे एक अध्ययन में 33,159 कैंसर शोध पत्रों की पड़ताल की गई, जिसमें से 4,000 से अधिक लेखों में फर्जी उद्धरण (साइटेशन) के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
अध्ययन के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे संगठित ‘पेपर मिल’ यानी फर्जी शोध गिरोहों की सक्रिय भूमिका सामने आई है। इन संदिग्ध रिसर्च पेपर्स को पब्लिकेशन के एक से तीन साल के भीतर सामान्य पेपर्स की तुलना में 50 से 100 फीसदी अधिक उद्धरण हासिल हुए, जबकि इन्हें पढ़ने और ऑनलाइन देखने वालों की संख्या बेहद कम थी।
‘पेपर मिल’ सिंडिकेट और चुनिंदा जर्नल्स में हेरफेर का खेल
शोधकर्ताओं ने पाया कि यह गड़बड़ी मुख्य रूप से कुछ खास जर्नल्स में केंद्रित थी। इनमें ‘जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल एंड क्लिनिकल कैंसर रिसर्च’ और ‘मॉलिक्यूलर कैंसर’ प्रमुख हैं। वहीं, अन्य वैज्ञानिक पत्रिकाओं पर इसका प्रभाव न के बराबर देखा गया, जिससे स्पष्ट है कि चुनिंदा मंचों को ही निशाना बनाया गया।
ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता एड्रियन बार्नेट के मुताबिक, ये गिरोह रिसर्च पेपर्स में नाम जोड़ने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। अकादमिक प्रतिष्ठा और रैंकिंग बढ़ाने के लिए उद्धरणों की संख्या में कृत्रिम रूप से हेरफेर किया जाता है, जो वैश्विक विज्ञान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
