Gwalior News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर के साधारण परिवार में जन्मे कार्तिक आर्यन आज बॉलीवुड के सबसे सफल अभिनेताओं में शामिल हैं। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और चाहते थे कि बेटा मेडिकल में करियर बनाए, लेकिन कार्तिक का सपना फिल्मों में अभिनय करना था।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बहाने मुंबई आए कार्तिक ने कॉलेज के साथ चुपचाप ऑडिशन देना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें भारी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। संघर्ष के दौर में वह किराए के फ्लैट में दोस्तों के साथ रहकर अपने सपनों को संजोते रहे।
‘प्यार का पंचनामा’ से मिली पहचान, लगातार हिट फिल्मों से बने स्टार
तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद 2011 में कार्तिक को ‘प्यार का पंचनामा’ मिली। फिल्म में उनका चर्चित मोनोलॉग दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘पति पत्नी और वो’ और ‘भूल भुलैया 2’ जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें स्टार बना दिया।
अपने करियर में नई चुनौती स्वीकार करते हुए कार्तिक ने कबीर खान की फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ चुनी। यह फिल्म मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर आधारित है। इस किरदार के लिए उन्होंने 18 किलो वजन घटाया और महीनों तक कठिन ट्रेनिंग करके खुद को तैयार किया।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान
फिल्म में उनके दमदार अभिनय की दर्शकों और समीक्षकों ने जमकर सराहना की। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मिला। यह उनका पहला राष्ट्रीय पुरस्कार है, जिसे उन्होंने मलयालम सुपरस्टार ममूटी के साथ साझा किया।
बिना किसी फिल्मी गॉडफादर के कार्तिक आर्यन ने अपनी मेहनत, धैर्य और प्रतिभा के दम पर बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई है। उनकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर मुंबई की ओर रुख करते हैं।