New Delhi News: भारत में स्कूली शिक्षा और बच्चों की बुनियादी योग्यताओं को लेकर वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ASER) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश में पांचवीं कक्षा के करीब 70 प्रतिशत छात्र अपनी कक्षा के स्तर का सरल अंकगणित नहीं कर पाते हैं, जो शिक्षा प्रणाली और रिपोर्ट कार्ड की असलियत पर बड़े सवाल खड़े करता है।
क्या कहती है एएसईआर की रिपोर्ट
ग्रामीण भारत के बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमताओं की जांच करने वाले इस सबसे बड़े घरेलू सर्वेक्षण के अनुसार, तीसरी कक्षा के 76.6 प्रतिशत छात्र दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ भी धाराप्रवाह नहीं पढ़ सकते हैं। इसके अलावा, हर तीन में से दो तीसरी कक्षा के बच्चे सरल घटाव के सवाल हल करने में असमर्थ हैं। जानकारों का मानना है कि यह स्थिति बच्चों की किसी कमी के कारण नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का परिणाम है जो बुनियादी कौशल को परखे बिना छात्रों को हर साल अगली कक्षा में प्रमोट करती जाती है।
सुधार की दिशा में कदम और राज्यों की स्थिति
हालांकि, हालिया आंकड़ों में कुछ सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिले हैं। सरकारी स्कूलों में तीसरी कक्षा के जो छात्र दूसरी कक्षा का पाठ पढ़ सकते थे, उनका अनुपात 2022 के 16.3 प्रतिशत से बढ़कर 23.4 प्रतिशत हो गया है। गुजरात, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 10 प्रतिशत या उससे अधिक का सुधार दर्ज किया गया है, जबकि हिमाचल प्रदेश और बिहार में इसी अवधि में 4 से 5 प्रतिशत अंकों की ही बढ़त देखने को मिली है।
अभिभावकों के लिए समझना क्यों है जरूरी
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अभिभावकों को केवल पासिंग मार्क्स वाले रिपोर्ट कार्ड पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। माता-पिता बच्चों की असल शैक्षणिक प्रगति जांचने के लिए उनसे अपनी कक्षा से दो नीचे की किताब का पैराग्राफ पढ़वाकर देख सकते हैं या बुनियादी गणितीय सवाल हल करवा सकते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी ‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता’ पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि बच्चे आगे की कक्षाओं में जाने से पहले बुनियादी कौशल में पूरी तरह दक्ष हो सकें।