Delhi News: दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार पहुंचने और घनी धुंध के चलते छोटे बच्चों की सेहत पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रदूषण और ठंड के प्रभाव से बच्चों में खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने सांस से जुड़े लक्षणों को अनदेखा न करने और तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी है।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विभिन्न इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। घने स्मॉग और एक्यूआई के 400 के पार चले जाने के कारण आम नागरिकों के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। मौसम में ठंडक और प्रदूषित हवा के एक साथ मिलने से छोटे बच्चों में श्वसन संबंधी समस्याएं जैसे खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने की शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, वयस्कों की तुलना में छोटे बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। इसके चलते वे जहरीली हवा और धूल के सूक्ष्म कणों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों में नाक बंद होना, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ की समस्याएं आम हो गई हैं।
फेफड़ों में सूजन और अस्थमा का खतरा: एम्स विशेषज्ञ
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कानाराम जाट ने बताया कि अत्यधिक प्रदूषित हवा में सांस लेने से बच्चों की श्वास नलियों और फेफड़ों में सूजन (इन्फ्लेमेशन) आ सकती है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर बच्चों में ब्रोंकाइटिस और आगे चलकर अस्थमा जैसी गंभीर श्वसन बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि छोटे बच्चे अपनी शारीरिक परेशानी या दर्द को स्पष्ट शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए माता-पिता को उनके दैनिक व्यवहार, खानपान और सांस लेने के तरीके पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
किन लक्षणों पर तत्काल ध्यान दें माता-पिता?
डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों में दिखने वाले कुछ सामान्य परिवर्तनों को मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें। यदि बच्चा निम्नलिखित लक्षणों का सामना कर रहा हो, तो तुरंत निकटतम चिकित्सक से संपर्क करें:
- बच्चा बार-बार और लगातार खांस रहा हो।
- रात के समय सोते वक्त सांस फूलने या तेज चलने की समस्या हो।
- सीने में जकड़न या सांस लेते समय घरघराहट जैसी आवाज सुनाई दे।
- बच्चा सामान्य दिनों की तरह खेलने-कूदने में रुचि न ले रहा हो।
- बच्चा अत्यधिक थका हुआ दिखे, लगातार चिड़चिड़ापन दिखाए या उसे ठीक से नींद न आ रही हो।