Hyderabad News: हैदराबाद में मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों की जमकर तारीफ की। उन्होंने हालिया विवाद के बीच छात्रों को निडर और बहादुर बताया। जस्टिस भुइयां ने कहा कि इन छात्रों ने दुनिया को दिखाया है कि कानून का छात्र कैसा होना चाहिए।
दीक्षांत समारोह विवाद के बाद छात्रों की बहादुरी सराही
जस्टिस भुइयां ने कुलपति प्रोफेसर श्रीकृष्ण देव राव और शिक्षकों के मार्गदर्शन की भी सराहना की। गौरतलब है कि अगस्त में छात्रों ने सीजेआई के आमंत्रण का विरोध किया था। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने छात्रों के पंजीकरण पर रोक लगा दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद वापस लिया गया।
वोटिंग अधिकार छीनना संविधान की मूल भावना के खिलाफ
छात्रों की प्रशंसा के साथ जस्टिस भुइयां ने मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लाखों नागरिकों को वोट के अधिकार से वंचित करना असंवैधानिक और मनमाना है। संविधान नागरिकों में भेदभाव नहीं करता। बड़े पैमाने पर वोट से वंचित करना अनुच्छेद 14 और 326 का खुला उल्लंघन होगा।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण पर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार बताते हुए इसे पूरी तरह वैध ठहरा चुका है। शीर्ष अदालत ने मई 2026 के फैसले में मतदाता पहचान को अनिवार्य माना था।