Shimla News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में साल 2014 से हुई 189 नियुक्तियों की जांच शुरू हो गई है। सीएजी की रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति बनाई है। पूर्व कुलपतियों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में रहेगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि जिन पूर्व कुलपतियों के कार्यकाल में ये नियुक्तियां हुई हैं, उनकी भूमिका की भी पूरी जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट को कार्यकारी परिषद के सामने रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित पूर्व कुलपतियों को बैठक में बुलाकर उनका पक्ष सुना जाएगा और जवाबदेही तय होगी।
सीएजी रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों पर उठे सवाल
सीएजी की अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में 186 नियुक्तियों में गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इन भर्तियों में अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट का संबंधित संस्थानों से वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था। इसके अलावा एक अयोग्य असिस्टेंट प्रोफेसर और एक गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति यूजीसी के नियमों के खिलाफ पाई गई है।
कुलपति ने बताया कि जांच कमेटी सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कार्यकारी परिषद के सामने प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद परिषद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो विश्वविद्यालय नियमों के तहत सख्त कदम उठाएगा।
यह समिति नियुक्तियों में अपनाई गई सेलेक्शन प्रोसेस, उम्मीदवारों की योग्यता, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, आरक्षण नियमों के पालन और सेलेक्शन कमेटी की कार्रवाई की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया यूनिवर्सिटी एक्ट और यूजीसी के नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं।
सीएजी रिपोर्ट में केवल भर्ती की गड़बड़ियां ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में 27 से 37 प्रतिशत तक फैकल्टी पद खाली रहने पर भी चिंता जताई गई है। इसके अलावा कमजोर रिसर्च वर्क, इंडस्ट्री के साथ सीमित एमओयू और शैक्षणिक ढांचे में कमियों की ओर भी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ध्यान दिलाया गया है।