New Delhi News: उच्चतम न्यायालय ने देश भर में नीट प्रश्नपत्र लीक का विरोध कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर गंभीर रुख अपनाया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान प्रदत्त अधिकार है। किसी आंदोलन का हवाला देकर पुलिस की ज्यादतियों या लाठीचार्ज को सही ठहराया नहीं जा सकता।
शीर्ष अदालत इस मामले में दर्ज विभिन्न याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है। पीठ में शामिल न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बल प्रयोग को लेकर पूरे देश में एक समान और स्पष्ट प्रोटोकॉल लागू होना बेहद जरूरी है।
‘हर जान की कीमत समान, असामाजिक तत्वों पर ही हो कानूनी कार्रवाई’
सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने प्रदर्शन में घायल हुए पुलिसकर्मियों का मुद्दा उठाया, तो सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के लिए उचित स्थान तय होना चाहिए। यदि आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आते हैं, तो उनसे कानून के अनुसार कड़ाई से निपटा जाना चाहिए।
मामले की संक्षिप्त सुनवाई के दौरान अधिवक्ता फौजिया शकील ने आरोप लगाया कि बिहार में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस ने एके-47 राइफल तक का इस्तेमाल किया। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी राज्य में छात्रों पर हुई हिंसा की घटनाओं का जिक्र किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में निष्पक्ष सहयोग का आश्वासन दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉजपा ने 36 दिनों का आंदोलन वापस लिया
नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च निकाला गया था। इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने और सरकार द्वारा अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद कॉजपा ने 36 दिन से चला आ रहा अपना आंदोलन वापस ले लिया। उधर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी पुलिस कार्रवाई के सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी को सुरक्षित रखने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।