Delhi News: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चैलेंज किया है। पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए उन्हें बॉन्ड भरने का आदेश दिया था। छात्रा नेता ने कोर्ट में साफ कहा कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं है।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच के सामने सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकर नारायण ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी से इजाजत मांगने की अनिवार्यता नहीं है। पुलिस का यह नोटिस पूरी तरह बेबुनियाद है। प्रशासन को कानून का सही अध्ययन करना चाहिए ताकि नागरिकों के अधिकारों का हनन न हो।
अदालत में पुलिस नोटिस की वैधता पर सवाल
दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने इस याचिका पर कानूनी सवाल उठाए। याचिकाकर्ता ने नोटिस को फौरन रद्द करने की अपील की है। साथ ही कोर्ट से पुलिस को यह निर्देश देने की मांग की है कि उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक एक्शन न लिया जाए।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत 17 अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया गया था। इसमें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने को कहा गया था। छात्र नेता से 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और एक गारंटर पेश करने के निर्देश दिए गए थे, ताकि इलाके में शांति बनी रहे।
बीएनएसएस की धारा 126 के तहत आदेश
कानून के तहत मजिस्ट्रेट को अशांति की आशंका होने पर मुचलका भरवाने का कानूनी अधिकार मिलता है। इससे पहले 16 अक्टूबर को एक मार्च में जाते समय नेहा को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया गया था। बाद में 17 अक्टूबर को रिहा किया गया। अब इस पूरे मामले पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
