Mumbai News: बैंकों का कर्ज न चुकाने के मामले में भगोड़ा घोषित कारोबारी विजय माल्या ने खुद पर चल रही कानूनी कार्रवाई को घोर अन्याय बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए उन्होंने अपनी स्थिति की तुलना कॉकरोच से की और दावा किया कि ऐसी जिंदगी से बेहतर तो एक कॉकरोच का जीवन होता है।
लंदन में रह रहे माल्या ने बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज वसूली मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश प्रवर्तन निदेशालय के हलफनामे का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत में स्वयं माना है कि बैंकों को चौदह हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी है।
ईडी हलफनामे में चौदह हजार करोड़ की रिकवरी का दावा
माल्या ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में बैंकों को 14,131.60 करोड़ रुपये सौंपे जाने की पुष्टि सरकारी हलफनामे के पैरा 17 में दर्ज है। इसके बावजूद मीडिया और व्यवस्था उन्हें एक धोखेबाज के तौर पर पेश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि रिकवरी के बाद भी लोग उनके रिफंड की बात क्यों नहीं करते।
ब्रिटेन की स्थायी नागरिकता और कानूनी बंदिशों की दलील
खुद को भगोड़ा कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कारोबारी ने कहा कि वे 1992 से यूनाइटेड किंगडम के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी पाबंदियों के कारण वे वर्तमान में ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते। कर्ज की अदायगी का उनकी भारत में व्यक्तिगत मौजूदगी से कोई सीधा संबंध नहीं होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने संसद में माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत दर्ज पंद्रह आरोपियों में शामिल बताया था। वहीं बॉम्बे हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया से लगातार दूर रहने पर माल्या को कड़ी फटकार लगाई थी और भारत वापसी पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए अंतिम अवसर दिया था।