National News: अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और प्रमुख टेक शेयरों में भारी बिकवाली दर्ज की गई। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों के करीब 3 लाख करोड़ डॉलर (लगभग 285 लाख करोड़ रुपये) डूब गए। नैस्डैक 5.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ तकनीकी करेक्शन मोड में चला गया है।
अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को तेज मंदी देखी गई, जिसने वैश्विक स्तर पर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के नतीजों के बाद एआई सेक्टर पर सख्त नियम और पर्यावरण संबंधी पाबंदियां लगाए जाने की आशंका से बाजार में भगदड़ की स्थिति बन गई। इस तेज बिकवाली के चलते नैस्डैक में पिछले 19 महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई।
गुरुवार को नैस्डैक कंपोजिट 5.5 प्रतिशत फिसलकर 24,315 के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही यह इंडेक्स तकनीकी रूप से करेक्शन मोड में आ चुका है, क्योंकि यह अपने हालिया ऑल-टाइम हाई (27,599.79) से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुका है। वहीं, डॉव जोन्स 3.4 प्रतिशत गिरकर 51,523 पर और एसएंडपी 500 इंडेक्स 4.4 प्रतिशत टूटकर 7,353 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में उतार-चढ़ाव और घबराहट मापने वाला सीबीओई वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) भी मार्च के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
बाजार में आई इस बिकवाली का सबसे बड़ा असर एआई और हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी दिग्गज कंपनियों पर पड़ा। सैनडिस्क के शेयर में 22.3 प्रतिशत और माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर में 17.5 प्रतिशत की भारी गिरावट आई।
प्रमुख चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया के शेयर एक दिन में 9.3 प्रतिशत टूट गए। इसके अलावा मेटा में 4 प्रतिशत, माइक्रोसॉफ्ट में 3.6 प्रतिशत, जबकि अल्फाबेट और अमेजन में 2.2-2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डेटा सेंटर कारोबार से जुड़ी कंपनियां आईआरईएन और अप्लाइड डिजिटल के शेयर भी 14 प्रतिशत तक फिसल गए।
सख्त रेगुलेशन की आशंका और ऊंचा वैल्यूएशन
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस अचानक आई गिरावट के पीछे अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद का राजनीतिक घटनाक्रम और कड़े रेगुलेशन की आशंका प्रमुख वजह है। वाशिंगटन, टेक्सास और ओहायो जैसे अहम राज्यों में नतीजों के बाद नए एआई डेटा सेंटर्स की स्थापना को लेकर कड़े पर्यावरण व प्रशासनिक नियम लागू होने की चिंता जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टेक और एआई सेक्टर का वैल्यूएशन वास्तविक स्तरों से काफी ऊपर चल रहा था। अत्यधिक उम्मीदों और वैल्यूएशन के दबाव के बीच नीतिगत बदलावों की आशंका ने इस बिकवाली को और तेज कर दिया।