Shimla News: हिमाचल प्रदेश में एक महीने के भीतर पेपर की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे राज्य के गत्ता उद्योग की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके चलते कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
पेपर के साथ-साथ इंक, गम और दूसरे कच्चे माल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि बाजार में तैयार गत्ते की उचित कीमत नहीं मिल पा रही है। इसके कारण उद्यमियों के लिए कारखाने चलाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। कारोबारियों ने राज्य सरकार से दखल देकर राहत देने की गुहार लगाई है।
गत्ता उद्योग संघ के अनुसार पेपर मिलों ने एक महीने में कई बार में 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक दाम बढ़ा दिए हैं। मिल मालिकों ने खाड़ी देशों में जारी जंग को इसकी मुख्य वजह बताया है। विदेशों से आने वाला कच्चा माल महंगा होने के कारण पेपर की कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है।
गत्ता उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमराज चौधरी ने बताया कि हिमाचल में 300 से अधिक गत्ता इकाइयां चल रही हैं। इन कारखानों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और अन्य गतिविधियों को भी इस क्षेत्र से रोजगार मिलता है।
राज्य की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में दवाओं, खाद्य पदार्थों और अन्य सामानों की पैकिंग के लिए गत्ते के बॉक्स का इस्तेमाल होता है। गत्ता उत्पादन महंगा होने से दूसरे उद्योगों की पैकेजिंग कॉस्ट भी बढ़ेगी। बैठक में संघ के पूर्व अध्यक्ष मुकेश जैन, उपाध्यक्ष विवियन, सुशील सिंगला और मोहित जैन सहित कई उद्यमी मौजूद रहे।