National News: धनतेरस के मौके पर सोने की कीमतों में गिरावट का दौर थमने के बाद फिर से मजबूती देखी जा रही है। जानकारों के अनुसार अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत से घटकर 4.85 प्रतिशत पर आ गई है। इस वैश्विक बदलाव के चलते बड़े संस्थागत निवेशक एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं।
त्योहारी सीजन में धनतेरस के अवसर पर सोने के बाजार में कीमतों की दिशा अचानक बदलती दिख रही है। हाल के दिनों तक कीमतों में और गिरावट आने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन वैश्विक वित्तीय बाजार में हुए बदलावों के कारण सोने के दाम फिर से चढ़ने लगे हैं। घरेलू और वैश्विक स्तर पर इस बदलाव का मुख्य कारण स्थानीय मांग के बजाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और बॉन्ड बाजार से जुड़े घटनाक्रम को माना जा रहा है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अक्टूबर तक सोने में आई कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड का 5 प्रतिशत से ऊपर चले जाना था। अंतरराष्ट्रीय पेंशन फंड, केंद्रीय बैंक और बड़े संस्थागत निवेशक सोने के मुकाबले सुरक्षित और सुनिश्चित ब्याज देने वाले अमेरिकी बॉन्ड में निवेश बढ़ा रहे थे, जिससे सोने की मांग पर दबाव बना हुआ था।
अमेरिकी चुनाव परिणाम और बॉन्ड यील्ड में गिरावट
अमेरिका में संसद (कांग्रेस) के मध्यावधि चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आया है। प्रतिनिधि सभा और सीनेट में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के बढ़ते प्रभाव से यह आकलन लगाया जा रहा है कि सरकार की आक्रामक खर्च नीतियों और भारी कर्ज लेने की योजनाओं पर अंकुश लग सकता है।
बाजार में इस संकेत के आते ही अमेरिकी बॉन्ड की सप्लाई कम होने की उम्मीद बंधी है। इसके परिणामस्वरूप 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर से फिसलकर लगभग 4.85 प्रतिशत पर आ गई है, जो पिछले दो महीनों का निचला स्तर है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से वैश्विक महंगाई का दबाव भी कुछ घटता दिखा है।
संस्थागत निवेशकों की वापसी से बाजार में मजबूती
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटने के कारण वैश्विक स्तर पर बड़े निवेशक फिर से सोने में निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। चूंकि संस्थागत निवेशक बड़े पैमाने पर खरीदारी करते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को समर्थन मिला है और गिरावट का सिलसिला रुक गया है।
भारतीय शेयर बाजार पर भी इस बदलाव का सकारात्मक असर देखा जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक जो बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर उभरते बाजारों से पूंजी निकाल रहे थे, वे अब भारतीय इक्विटी बाजार में भी वापसी के संकेत दे रहे हैं।
धनतेरस पर निवेश का नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में आगामी दिनों में कितनी तेजी आएगी, यह भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के रुख पर निर्भर करेगा। हालांकि, मौजूदा वित्तीय परिस्थितियों और घटती बॉन्ड यील्ड को देखते हुए निकट भविष्य में कीमतों में भारी गिरावट की संभावना काफी कम हो गई है। ऐसे में धनतेरस पर सोने की खरीदारी को केवल रस्म तक सीमित न मानकर मध्यम और लंबी अवधि के विविधीकृत निवेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।