Delhi News: भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई अब ऑनलाइन फूड प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर बेहद कड़े कदम उठाने जा रहा है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुन्हानी ने स्पष्ट किया है कि अगले महीने से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की विशेष जांच शुरू होगी और उन्हें तय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
एग्रीगेटर कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी ई-कॉमर्स कंपनियां
प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन बिक्री करने वाली कंपनियां सिर्फ मध्यस्थ होने की दलील देकर अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकतीं। कंपनियों को खुद उत्पादों की गुणवत्ता जांचनी होगी। इसके साथ ही अगले साल तक ई-कॉमर्स और प्रोडक्ट्स पर छपने वाले लेबलिंग नियमों में बड़े तकनीकी सुधार लागू किए जाने की पूरी तैयारी है।
उत्पादों के दावों और भ्रामक विज्ञापनों पर रोक
नए नियमों के तहत बिना ठोस आधार के शत-प्रतिशत शुद्ध या प्राकृतिक जैसे शब्दों का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। केवल एकल सामग्री वाले प्राकृतिक उत्पादों को ही कुछ शर्तों पर इसकी छूट मिलेगी। ऊर्जा देने का दावा करने वाले पेय पदार्थों पर एनर्जी ड्रिंक शब्द लिखने की अनुमति नहीं होगी, इन्हें कैफीनयुक्त पेयों में गिना जाएगा।
भ्रामक विज्ञापनों को बढ़ावा देने के आरोप में नियामक ने छह जानी-मानी हस्तियों को नोटिस भेजे हैं, जिनमें से तीन ने अपना पक्ष रख दिया है। कार्बोनेटेड और अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों पर लाल चेतावनी का निशान लगाने की योजना है, जिससे आम उपभोक्ता खरीदारी करते समय सामग्री के प्रति पूरी तरह सतर्क रह सकें।
नियम तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी शिकंजा
खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बड़े स्तर पर कानूनी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। बीते छह महीनों के दौरान असुरक्षित भोजन बेचने के आरोप में करीब 600 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। पूरे देश में मिलावट और खराब लेबलिंग के मामलों में 1,900 लोगों को दोषी ठहराया गया और 33 हजार नोटिस जारी हुए।
स्कूलों के आसपास जंक फूड पर रोक का प्रस्ताव
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में अधिक वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकारी शोध संस्थान आईसीएमआर-एनआईएन द्वारा तय किए गए वैज्ञानिक मानकों के आधार पर इन अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की पहचान कर सख्त प्रतिबंध लगाने की योजना है।