आईआईटी मंडी का एक्सटेंशन कैंपस पालमपुर में शिफ्ट करने पर उपजा विवाद, समाजसेवियों ने आंदोलन और कोर्ट जाने की दी चेतावनी

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Mandi News: आईआईटी मंडी का एक्सटेंशन कैंपस पालमपुर में स्थापित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होते ही मंडी जिले का सियासी और सामाजिक माहौल गरमा गया है। मुख्यमंत्री के आईटी चीफ एडवाइजर गोकुल बुटेल और आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार के हालिया बयानों पर स्थानीय अधिवक्ताओं तथा समाजसेवियों ने कड़ा ऐतराज जताया है।

पालमपुर में 500 कनाल भूमि की लीज प्रक्रिया पूरी होने और 800 कनाल अतिरिक्त भूमि की फॉरेस्ट क्लीयरेंस संबंधी खबरों के बाद मंडी के समाजसेवी उदयनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंडी के अधिकारों की रक्षा के लिए वह कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे।

मंडी में 539 एकड़ भूमि मौजूद फिर पालमपुर क्यों

पत्रकार वार्ता के दौरान उदयनंद ने भूमि के आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि तत्कालीन सरकार ने कमांद में 503 एकड़ जमीन दी थी। इसके अतिरिक्त ब्यूली में 28 एकड़ और घोड़ा फार्म के पास 28 एकड़ भूमि तकनीकी शिक्षा विभाग के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंडी में पहले से ही 539 एकड़ जमीन उपलब्ध है और उसका पूरा इस्तेमाल भी नहीं हुआ है, तो फिर पालमपुर में कुल 1350 कनाल (500 कनाल लीज + 800 कनाल फॉरेस्ट क्लीयरेंस) भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

स्थानीय निवासियों के रोजगार पर संकट

उदयनंद ने स्पष्ट किया कि कांगड़ा या पालमपुर के विकास से किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन मंडी के लोगों के त्याग की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिस मंडी के ग्रामीणों और पशुपालन विभाग ने अपनी 160-161 एकड़ जमीन संस्थान के लिए दी, उनके भविष्य का क्या होगा?

उन्होंने कहा कि गोकुल बुटेल के मुताबिक आईआईटी के कुछ प्रोफेसर बेहतर सुविधाओं के लिए कैंपस पालमपुर ले जाना चाहते हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि एक्सटेंशन कैंपस के नाम पर धीरे-धीरे मुख्य विभागों को वहां शिफ्ट करने का हिडन एजेंडा चलाया जा रहा है।

अदालत जाने और अनशन करने की चेतावनी

यदि मुख्य विभागों को स्थानांतरित किया जाता है, तो कमांद और द्रंग विधानसभा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का रोजगार छिन जाएगा, जिनकी रोजी-रोटी इसी कैंपस पर टिकी है। उदयनंद ने जिले के सभी जन प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक साथ आने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जल्द ही दस्तावेज जुटाकर मामले को अदालत में ले जाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर क्रमिक अनशन शुरू करेंगे। कांगड़ा को डिजास्टर फ्री बताने के दावे पर उन्होंने 1905 के विनाशकारी भूकंप की याद दिलाते हुए कहा कि वह इलाका आज भी सीस्मिक जोन में आता है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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