Washington News: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक घेराबंदी सख्त करते हुए अमरीकी सीनेट ने सेंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नए विधेयक के तहत रूस से ईंधन खरीदने वाले भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान से अमरीका आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।
जेलेंस्की की मौजूदगी में सीनेट में पास हुआ बिल
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार इस कड़े विधेयक को मंगलवार को पेश किया गया। जिस दौरान अमरीकी कैपिटल हिल में वोटिंग चल रही थी, उस वक्त यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की भी वहां मौजूद थे। इस बिल के पक्ष में 86 और विरोध में केवल 12 सीनेटरों ने मतदान किया।
भारतीय निर्यात और व्यापार पर पड़ेगा बड़ा असर
वर्तमान में भारत से अमरीका भेजे जाने वाले उत्पादों पर करीब 10 फीसदी टैरिफ लगता है, जबकि चीन के लिए यह दर 12.5 फीसदी है। नए कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सीधे 100 फीसदी तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इससे अमरीकी बाजार में भारतीय सामान दो गुना महंगा हो जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच नई चुनौती
यह अमरीकी फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही ठप है। खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति बंद होने के कारण भारतीय कंपनियों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए रूसी क्रूड ऑयल पर निर्भरता बढ़ानी पड़ी है। भारत पहले खाड़ी से 40 फीसदी तेल मंगाता था।
विशेष शर्तों के तहत मिलेगी टैरिफ से राहत
अमरीकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल के अनुसार विधेयक में छूट का प्रावधान भी रखा गया है। अगर कोई देश रूस के कुल गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम हिस्सा खरीदता है, तो उसे इस नियम से छूट मिल सकती है। हालांकि भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों के लिए फिलहाल यह स्थिति गंभीर बनी हुई है।