National News: फारस की खाड़ी में मिसाइल हमले की चपेट में आए एलएनजी टैंकर एमटी अल मायेदा पर सवार सभी छह भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने स्थिति पर नजर रखे जाने की पुष्टि की है।
पश्चिम एशिया में जारी गंभीर क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकराव के बीच फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की ताजा घटना सामने आई है। मार्शल द्वीपसमूह के ध्वज वाले तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक पोत ‘एमटी अल मायेदा’ पर शुक्रवार को मिसाइल से हमला किया गया। इस पोत पर छह भारतीय नाविकों समेत कुल 25 सदस्यीय चालक दल मौजूद था। राहत की बात यह है कि हमले में सभी भारतीय नाविक और चालक दल के अन्य सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए पुष्टि की कि घटना में किसी भी नाविक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा व कुशलता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पोत प्रबंधन कंपनी के निरंतर संपर्क में है।
29 और 30 अक्टूबर की घटनाओं में सभी भारतीय सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल के अनुसार, 29 और 30 अक्टूबर को अलग-अलग समुद्री मार्गों पर हमलों की चपेट में आए दो जहाजों पर सवार कुल 29 भारतीय चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं। इससे पूर्व, 27 भारतीय नाविकों को ले जा रहे पनामा के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘एमटी लुईस 1’ को होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर लिम्पेट माइंस के जरिए निशाना बनाया गया था।
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बाद से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में वाणिज्यिक जहाजों पर लिम्पेट माइंस और मिसाइल जैसे घातक विस्फोटकों के इस्तेमाल की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
समुद्री संघर्ष में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष और जहाजों पर हो रहे लगातार हमलों के कारण अब तक 14 नाविकों समेत 22 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री गलियारे में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ-साथ भारत की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। केंद्र सरकार इन संवेदनशील जलक्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों और उन पर कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए राजनयिक व प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी रख रही है।