Ujjain News: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को उज्जैन से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू कर दी है। यात्रा की शुरुआत से पहले उन्होंने इंदौर में स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी यात्रा है और इसका कांग्रेस पार्टी से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
कांग्रेस संगठन ने भी इस यात्रा से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है। दरअसल, यह पदयात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुजरेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यात्रा के दौरान राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और भ्रष्टाचार का विषय उठने पर भाजपा इसे सनातन विरोधी रुख के रूप में भुना सकती है।
गठबंधन के पीडीए नैरेटिव और सवर्ण समीकरण पर नजर
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को आशंका है कि दिग्विजय सिंह की इस पहल से विपक्षी गठबंधन का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव प्रभावित हो सकता है। इसी सियासी नफे-नुकसान को देखते हुए कांग्रेस ने भी इस यात्रा से सुरक्षित दूरी बनाए रखने का फैसला किया है, ताकि तुष्टीकरण के आरोपों से बचा जा सके।
दिग्विजय सिंह ने महाकालेश्वर मंदिर और चिंतामन गणेश के दर्शन-पूजन के बाद अपनी पदयात्रा का आगाज किया। लगभग 930 किलोमीटर लंबी यह यात्रा कई चरणों में पूरी होगी। यात्रा गैर-राजनीतिक बताई जा रही है, लेकिन मार्ग में जनसंवाद के जरिए वोट चोरी, चढ़ावा चोरी, सनातन परंपरा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए जाएंगे।
कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस और दिग्विजय पर सियासी तंज
दिग्विजय सिंह के सड़क पर उतरते ही मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने दिग्विजय सिंह को कोई काम नहीं सौंपा है, इसलिए वे इस तरह की पदयात्राओं पर निकल पड़े हैं। आने वाले दिनों में इसके गहरे राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
