New Delhi News: केंद्र सरकार ने सभी नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 फीसदी तक सीमित करने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य दवाओं के भारी मार्क-अप को रोकना है। इससे मरीजों को सस्ती दरों पर जरूरी जीवनरक्षक दवाएं मिल सकेंगी।
इस महीने के अंत से लागू होगा फैसला, 110 दवाओं के घटेंगे रेट
यह नया नियम इसी महीने के आखिर से लागू किया जाएगा। इसके प्रभाव से 110 कैंसर दवाओं की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी, जिनमें 35 पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इस नीति से घरेलू और आयातित, दोनों श्रेणियों की ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति बाधित हुए बिना कीमतें नियंत्रित होंगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में निजी अस्पतालों द्वारा कैंसर दवाओं की मनमानी कीमतें वसूलने पर सुनवाई चल रही है। कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि निजी अस्पताल तीमारदारों को अपनी ही फार्मेसी से अत्यधिक महंगे दामों पर दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार, बताया था दिन-दहाड़े डकैती
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भारी मुनाफे पर सख्त नाराजगी जताई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इसे दिन-दहाड़े डकैती करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जो दवा 2,700 रुपये में मिलती है, उसकी एमआरपी 27,000 रुपये तक छाप दी जाती है।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सरकारी योजनाओं में इस बढ़ी हुई कीमत का बोझ करदाताओं पर पड़ता है, क्योंकि अस्पताल सरकार से रीइम्बर्समेंट लेते हैं। पीड़ित परिवारों की याचिकाओं के बाद अब सरकार ने ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तय कर मरीजों को इस आर्थिक शोषण से बड़ी राहत दी है।
