Mandi News: पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना के तहत बिजणी से पद्धर के बीच नवनिर्मित लगभग 19 किलोमीटर लंबे सुपर हाईवे की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बाद उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की पांच सदस्यीय तकनीकी टीम ने दिल्ली से पहुंचकर मौके पर निरीक्षण का जिम्मा संभाल लिया है।
तकनीकी विशेषज्ञों और भूगर्भ विज्ञानियों द्वारा विस्तृत जांच
इस विशेषज्ञ टीम में तकनीकी अधिकारी और वरिष्ठ भूगर्भ विज्ञानी शामिल हैं, जो पांच दिनों तक निर्माण कार्यों का गहन जायजा लेंगे और अपनी विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेंगे। टीम द्वारा हाईवे पर बिछाई गई टारिंग, पुलों की मजबूती, चौड़ाई और भूस्खलन वाले संवेदनशील क्षेत्रों में बनी रिटेनिंग दीवारों की मजबूती परखी जा रही है।
तीन दिनों की तकनीकी जांच के दौरान अब तक किसी बड़ी खामी या तकनीकी कमी की पुष्टि नहीं हुई है। द्रंग के विधायक पूर्ण चंद ठाकुर और स्थानीय निवासियों ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए थे। लगातार मिल रही जन शिकायतों का संज्ञान लेकर ही मंत्रालय ने स्वतंत्र जांच दल को मंडी भेजने का निर्णय लिया।
बारिश से हुए नुकसान की मरम्मत और दूरी में कमी
सुपर हाईवे का मुख्य निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, जिसे नवंबर 2026 तक अंतिम रूप दिया जाना है। 784 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में भारी बारिश के दौरान कई स्थानों पर डंगे दरकने से नुकसान हुआ था, जिसे संबंधित निर्माण कंपनी द्वारा फिलहाल ठीक कराया जा रहा है।
मार्ग के री-अलाइनमेंट के बाद बिजणी से पद्धर के बीच की दूरी में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पहले इस हिस्से की कुल दूरी 22.815 किलोमीटर थी, जो करीब 13 किलोमीटर मार्ग के नए संरेखण के बाद घटकर 19 किलोमीटर रह गई है। इससे सफर में समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।