आईआईटी मंडी के अध्ययन में खुलासा: सराज का 27 फीसदी हिस्सा बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील, एएनएन मॉडल से हुआ शोध

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Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज क्षेत्र में मानसूनी बारिश के दौरान बाढ़ के खतरे का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों द्वारा आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क (एएनएन) मॉडल के जरिए किए गए अध्ययन में क्षेत्र का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा संवेदनशील पाया गया है।

पुराने आंकड़ों और भौगोलिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण

यह महत्वपूर्ण अध्ययन प्रो. डेरिक्स पी. शुक्ला के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम द्वारा किया गया। टीम ने वर्ष 2021 से 2025 तक के बाढ़ रिकॉर्ड और थुनाग एसडीएम कार्यालय से प्राप्त नुकसान के ब्योरे का विश्लेषण किया। शोध में 111 बाढ़ प्रभावित और 111 गैर-बाढ़ वाले कुल 222 स्थानों के आंकड़ों को आधार बनाया गया।

मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए जमीन की ढलान, ढलान की दिशा, ऊंचाई, नदी से दूरी और मिट्टी की बनावट जैसे महत्वपूर्ण कारकों को शामिल किया गया। शोध में सामने आया कि पूर्व दिशा की ओर ढलान वाले इलाके, 32 डिग्री से अधिक तीव्र ढलान और 2462 से 2743 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्र बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

आपदा प्रबंधन में सहायक होगा तकनीकी मॉडल

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह कंप्यूटर मॉडल बाढ़ की सटीक तारीख या समय नहीं बताता, बल्कि भौगोलिक बनावट के आधार पर संवेदनशील इलाकों की पहचान करता है। आने वाले समय में बारिश की तीव्रता, मिट्टी की नमी और नदियों के जलस्तर के रियल-टाइम डेटा को जोड़कर इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

आईआईटी मंडी के अनुसार, यह शोध कार्य राजकीय हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर के इंटर्न के सहयोग से लगभग एक वर्ष में पूरा हुआ है। शोध टीम की योजना भविष्य में डेटा उपलब्धता के आधार पर हिमाचल प्रदेश के अन्य आपदा संभावित क्षेत्रों में भी इसी तरह का तकनीकी अध्ययन करने की है, ताकि सुरक्षा प्रबंध पुख्ता किए जा सकें।

Desh Raj
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