Shimla News: नेपाल में ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद हिमाचल प्रदेश में बांधों की सुरक्षा पर चिंता काफी बढ़ गई है। विधानसभा सत्र में पेश रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 15 निर्दिष्ट बांधों का खतरा वर्गीकरण किया गया है। इनमें 12 बांध अति संवेदनशील क्लास-1 और 3 बांध क्लास-2 की श्रेणी में आए हैं।
राज्य बांध सुरक्षा संगठन की 2025-26 की रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर बांधों का कामकाज संतोषजनक है। हालांकि, गिरि जटोन बैराज, मलाणा-1 और मलाणा-2 परियोजनाओं में गंभीर कमियां पाई गई हैं। इनमें तत्काल मरम्मत, स्पिलवे निर्माण, मॉनिटरिंग उपकरणों की बहाली और इमरजेंसी चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने की सख्त जरूरत बताई गई है।
निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक गिरि जटोन बैराज के पियर में दरारें और खिसकाव देखा गया है। वहीं वहां तैनात सुरक्षा उपकरण भी बंद पड़े हैं। मलाणा-2 में स्पिलवे का काम रुका हुआ है। मलाणा-1 में रिटेनिंग वॉल की मरम्मत चलने के कारण इसे रन-ऑफ-द-रिवर मोड पर चलाया जा रहा है।
बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के नियमों के तहत जनहानि, संपत्ति के नुकसान और पर्यावरणीय असर के आधार पर यह वर्गीकरण किया गया है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण ने इसके सुरक्षा नियम 5 दिसंबर 2024 को प्रकाशित किए थे। राज्य में तय सभी 15 बांधों की सुरक्षा जांच का काम अब पूरा किया जा चुका है।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कुल 26 बांध चालू हैं और चार का निर्माण कार्य जारी है। इनमें से 17 बांध राज्य बांध सुरक्षा संगठन के सीधे नियंत्रण में आते हैं। राज्य की 24,567 मेगावाट दोहन योग्य जलविद्युत क्षमता में से अब तक 12,438 मेगावाट बिजली का उत्पादन सफलता से शुरू किया जा चुका है।