Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर नए सैन्य हमले नहीं करेगा। दोनों देशों के बीच बैकडोर बातचीत जारी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उनकी टीम तेहरान के साथ बेहद उपयोगी चर्चा में जुटी हुई है।
जून महीने में हुआ अल्पकालिक युद्धविराम समझौता पूरी तरह टूटा
दोनों देशों ने जून में साठ दिनों के शांति समझौते पर दस्तखत किए थे। हालांकि यह समझौता लंबे समय तक नहीं टिक सका। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और नई सैन्य कार्रवाइयों के चलते यह संधि कुछ ही हफ्तों में टूट गई। राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इस समझौते को मंजूरी दी थी।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्हें अमेरिका का जवाबी प्रस्ताव मिला है। तेहरान जल्द ही इस पर अपना अंतिम फैसला देगा। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ लगातार ईरानी अफसरों से संपर्क में हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरानी पक्ष संघर्ष रोकने के लिए किसी भी शर्त को मानने को तैयार दिखता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना ने बढ़ाई कड़ी चौकसी
अमेरिकी नौसेना रात के अंधेरे में ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके तेल टैंकरों को सुरक्षित निकाल रही है। दूसरी तरफ अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। खाड़ी देशों की मदद से आपूर्ति सामान्य हो रही है, लेकिन टैंकरों का दैनिक किराया दस लाख डॉलर पार कर चुका है।
क्षेत्र में सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए तीसरा विमानवाहक पोत भेजा जा रहा है। यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट अक्टूबर के अंत तक हजारों सैनिकों के साथ वहां पहुंचेगा। इस बीच हूती विद्रोही सऊदी अरब के प्रमुख ठिकानों पर ड्रोन दाग रहे हैं। वहीं यूएसएस अब्राहम लिंकन लंबी ड्यूटी के बाद वापस अपने बेस लौट चुका है।