Riyadh News: लाल सागर से सुरक्षित आवाजाही के लिए यमन के हूती विद्रोही जहाजों को ईमेल के जरिए ट्रांजिट परमिट जारी कर रहे हैं। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जांच के बाद कुछ जहाजों को सात दिन की अनुमति दी गई है। वहीं, संघर्ष रोकने के एवज में सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर मांगने के दावों को रियाद ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया है।
लाल सागर के रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षा की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने अब इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक अनुमति प्रणाली शुरू की है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, कई जहाजों को संभावित हमलों से बचकर सुरक्षित निकलने के लिए हूतियों को पहले ईमेल भेजकर मंजूरी लेनी पड़ रही है।
ईमेल के जरिए दी जा रही 7 दिनों की ट्रांजिट मंजूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, कई जहाजों के क्रू मेंबर्स और संबंधित ईमेल पत्राचार से यह पुष्टि हुई है कि हूती विद्रोहियों से संपर्क करने पर वे सामान्यतः 24 घंटे के भीतर ईमेल का जवाब दे देते हैं। एक जहाज के कप्तान ने अपने ईमेल में यह स्पष्ट किया कि उनके पोत का इजरायल, ब्रिटेन या अमेरिका से कोई संबंध नहीं है, जिसके बाद सुरक्षित मार्ग की पुष्टि मांगी गई।
इसी तरह, चीन के एक कंटेनर जहाज द्वारा अनुमति मांगे जाने पर हूतियों ने प्रतिबंधित जहाजों से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात स्वीकारते हुए उसे सात दिनों का ट्रांजिट परमिट जारी किया। हूतियों ने जहाज प्रबंधन को अपने ईमेल अलर्ट नेटवर्क से जुड़ने का प्रस्ताव भी दिया, ताकि समुद्री मार्ग की ताजा जानकारी साझा की जा सके।
सऊदी अरब से 51 अरब डॉलर मांगने का दावा
रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष समाप्ति को लेकर हुई प्राथमिक बातचीत के दौरान विद्रोहियों ने भारी रकम की मांग रखी। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि हूतियों ने वर्षों के सैन्य अभियानों और नाकेबंदी से हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर 51 अरब डॉलर की मांग की है। इसके अतिरिक्त, वे सऊदी अरब से यमन के आधिकारिक शासक के रूप में मान्यता दिए जाने का भी दबाव बना रहे हैं।
सऊदी अरब ने रिपोर्ट को बताया पूरी तरह मनगढ़ंत
सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री और सार्वजनिक कूटनीति के प्रभारी राजदूत रायद क्रिमली ने इन दावों का कड़ा खंडन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर कहा कि हूतियों की कथित वित्तीय मांगों से जुड़ी रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी है।
क्रिमली ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोही लाल सागर में निर्दोष व्यापारिक जहाजों, नागरिक ठिकानों और आर्थिक केंद्रों पर हमले करके शांति के प्रयासों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विद्रोही संगठन ने यमन को ऐसे निरर्थक संघर्षों में झोंका है, जिससे स्थानीय जनता को भुखमरी और गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।