नेपाल और चीन सीमा पर मलबे से बनी झील फटने का खतरा, अगले तीन दिनों में भयंकर बाढ़ का अलर्ट जारी

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Kathmandu News: नेपाल और चीन के सीमावर्ती पहाड़ी इलाके में हालिया तबाही के बाद अब दूसरी बाढ़ का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ग्लेशियर टूटने से नदियों में भारी मलबा जमा हो गया है, जिससे दो विशाल कृत्रिम झीलें बन गई हैं। पानी का दबाव बढ़ने से इनके फटने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ से दोनों देशों के प्रभावित क्षेत्र अभी संभल भी नहीं पाए हैं। उस आपदा में नेपाल में 389 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 1400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। तिब्बत में भी तीन मौतें दर्ज हुईं और 558 लोग लापता हैं।

आपदा प्रबंधन ने नदी किनारे रहने वालों को किया सतर्क

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मलबे से नदी का स्वाभाविक रास्ता पूरी तरह रुक गया है। इससे बनी झील का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों, यात्रियों और बचाव दलों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने और सतर्क रहने की सख्त सलाह दी है।

काठमांडू स्थित अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के क्लाइमेट एक्सपर्ट कियांगगोंग झांग ने भी हालात को बेहद चिंताजनक बताया है। उनके अनुसार, सीमा के ऊपरी हिस्से में नदी का मार्ग अवरुद्ध होना सीधे तौर पर एक और भीषण बाढ़ आने का स्पष्ट संकेत दे रहा है।

चीन की चेतावनी, 1200 ओलंपिक साइज पूल जितना पानी

चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर पानी झील में जमा हो सकता है। यह पानी 1,200 ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल के बराबर है। 1 सितंबर के आसपास जलस्तर का दबाव अपने चरम पर पहुंचने की प्रबल संभावना जताई गई है।

चीनी मीडिया द्वारा जारी हवाई तस्वीरों में मलबे के पीछे विशाल मटमैला पानी रुका हुआ दिख रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले सप्ताह में भारी बारिश का अनुमान जताया है। हाइड्रोलॉजी विभाग के रिसर्चर झू जिनफेंग के मुताबिक, पानी बढ़ने के साथ झील टूटने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

Desh Raj
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