Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल स्थिति पर एक सर्वे रिपोर्ट जारी हुई है। एनलाइटन्ड इंडिया फाउंडेशन के अध्ययन में सामने आया कि केवल 14 फीसदी महिलाएं ही डिजिटल पेमेंट के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करती हैं। रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भी कई बातें कही गई हैं।
21 गांवों की 402 महिलाओं पर आधारित रिपोर्ट
धर्मशाला के सिद्धपुर स्थित ईआईएफ ने कांगड़ा जिला के 21 गांवों की 402 महिलाओं पर ‘कांगड़ा रूरल वीमेन एजेंसी एंड इंक्लूजन असेसमेंट-2026’ रिपोर्ट तैयार की है। संस्था की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर प्रियंका ने बताया कि इसे जिला प्रशासन और महिला आयोग को सौंपने के बाद सार्वजनिक किया गया है। संस्था का लक्ष्य जमीनी सच्चाई को सरकारी नीतियों से जोड़ना है।
सुरक्षा और बाल विवाह पर चौंकाने वाले आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, 87 प्रतिशत महिलाएं शाम से सुबह के बीच घर से बाहर निकलने में खुद को असुरक्षित मानती हैं। संस्था पिछले पांच वर्षों से स्मिता चौधरी और शिवाति जसरोटिया के नेतृत्व में स्वतंत्र रूप से काम कर रही है। सर्वे में बाल विवाह की समस्या का भी जिक्र किया गया है, जो इस क्षेत्र में पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी कम
सर्वे से पता चलता है कि 96 फीसदी महिलाएं घर में अपनी बात रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। हालांकि, केवल 42 फीसदी महिलाएं ही घर के आर्थिक फैसलों में भाग लेती हैं। इसके अलावा 12 फीसदी महिलाओं की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हुई थी, जबकि अधिकांश महिलाओं का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले ही हो गया था।
डिजिटल जागरूकता और साइबर सुरक्षा में कमी
डिजिटल सुरक्षा के मामले में महिलाओं के बीच जागरूकता की भारी कमी देखी गई है। सर्वे में शामिल 21 फीसदी महिलाओं ने माना कि वे किसी भी अजनबी के मांगने पर अपनी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी शेयर कर सकती हैं। यह आंकड़ा ग्रामीण इलाकों में साइबर सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत को साफ तौर पर उजागर करता है।