देवभूमि उत्तराखंड का ‘माणा’ गांव: जानिए भारत के पहले गांव और इसकी पौराणिक कहानियों का अनोखा इतिहास

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Chamoli News: देवभूमि उत्तराखंड में हर दो कदम पर कोई न कोई ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का स्थल मौजूद है। इसी खूबसूरत राज्य के चमोली जिले में बद्रीनाथ से लगभग 3-4 किलोमीटर दूर स्थित ‘माणा’ गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। इसे अब आधिकारिक रूप से भारत का पहला गांव माना जाता है।

आखिरी से कैसे बना भारत का पहला गांव?

भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित होने के कारण माणा को पहले ‘भारत का आखिरी गांव’ कहा जाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद सीमावर्ती इलाकों के विकास को प्राथमिकता देते हुए इसे देश के ‘पहले गांव’ का दर्जा दिया गया। सरकार का मकसद सीमावर्ती क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा में सबसे आगे रखना है।

पौराणिक मान्यताएं और ‘मणिभद्र’ से जुड़ा इतिहास

इस गांव का नाम पौराणिक मान्यता के अनुसार ‘मणिभद्र’ के नाम पर पड़ा था। लोककथाओं और मिथकों के अनुसार, इस गांव को भगवान शिव का विशेष वरदान प्राप्त है। ऐसा माना जाता था कि यहां आने वाले व्यक्ति की दरिद्रता दूर हो जाती है। इसी विश्वास के कारण प्राचीन काल से ही श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में यहां आते रहे हैं।

सरस्वती और अलकनंदा नदी का पवित्र संगम

आमतौर पर सरस्वती नदी को गुप्त माना जाता है, लेकिन समुद्र तल से लगभग 18,000 फीट की ऊंचाई पर बसे माणा में सरस्वती नदी अपने विकराल रूप में बहती दिखाई देती है। इसी जगह पर पवित्र सरस्वती और अलकनंदा नदी का अद्भुत उद्गम और संगम देखने को मिलता है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का मुख्य केंद्र है।

देश की ‘पहली चाय की टपरी’ का खास आकर्षण

पहाड़ों की यात्रा के दौरान चाय और मैगी का स्वाद सफर को बेहद खास बना देता है। माणा गांव में स्थित लगभग 25 साल से भी ज्यादा पुरानी चाय की दुकान पहले ‘भारत की आखिरी चाय की दुकान’ के नाम से मशहूर थी, जो अब ‘भारत की पहली चाय की टपरी’ के रूप में पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।

Desh Raj
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