Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह छोटा सत्र हंगामे और राजनीतिक बयानबाजी में बर्बाद नहीं होना चाहिए। इस सत्र का मुख्य ध्यान जनकल्याण और जरूरी जन-मुद्दों पर होना चाहिए।
संसदीय कार्यप्रणाली और अफसरशाही पर नियंत्रण बेहद जरूरी
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में अफसरशाही को संविधान के प्रति जवाबदेह बनाना बहुत जरूरी है। अगर विधानमंडल के सत्र लगातार छोटे होते रहेंगे, तो विधायिका का प्रभाव कम हो जाएगा। छोटा सत्र होने के कारण यह चिंता होना स्वाभाविक है कि क्या यह अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर पाएगा।
संसद की तर्ज पर हंगामे से बचने की सलाह
पूर्व मुख्यमंत्री ने संसद के मौजूदा सत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल को राजनीतिक टकराव से बचना चाहिए। देश में लोकतंत्र की मजबूती और अफसरों पर लगाम लगाने के लिए विधायिका का सशक्त होना आवश्यक है। इसके लिए सरकार और विपक्ष दोनों को गंभीर और जिम्मेदार संसदीय आचरण दिखाने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का यह मानसून सत्र 3 अगस्त से 6 अगस्त तक चलेगा। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार का यह संभवतः अंतिम सत्र माना जा रहा है। सरकार इसमें 4 अगस्त 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। वर्तमान में 403 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में बसपा का केवल एक विधायक है।