Delhi News: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के बीच लंबे समय से चला आ रहा वैवाहिक विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की आपसी सहमति से तलाक लेने की अर्जी को मंजूरी दे दी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने पर सहमत हैं।
अदालत की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत को बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी समझ से अलग होने का निर्णय लिया है। इसके बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 की विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस मामले को हमेशा के लिए निपटा दिया।
होटल में पहली मुलाकात से शादी और अलगाव तक का सफर
रिपोर्ट के अनुसार उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात दिल्ली के प्रसिद्ध ओबेरॉय होटल में काम के दौरान हुई थी। दोनों का प्यार परवान चढ़ा और सितंबर 1994 में वे शादी के बंधन में बंध गए। दोनों के दो बेटे भी हैं। हालांकि, आपसी अनबन के कारण वे 2009 से अलग रहने लगे और 2011 में अलगाव का ऐलान हुआ।
फैमिली कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की लंबी कानूनी लड़ाई
उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में क्रूरता के आधार पर फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पर्याप्त सबूत न होने के कारण उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन दिसंबर 2023 में हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और अपील खारिज कर दी।
इस कानूनी लड़ाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि उमर अब्दुल्ला अपनी पत्नी को 1.5 लाख रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देंगे। साथ ही बेटे की पढ़ाई के लिए 60 हजार रुपये प्रति माह भुगतान करने का निर्देश भी दिया था। हाई कोर्ट के इस रुख के बाद ही मामला देश की शीर्ष अदालत में पहुंचा था।