Bhopal News: मध्य प्रदेश की 79 वर्षीय सेवानिवृत्त बॉटनी प्रोफेसर डॉ. स्वर्णलता तिवारी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उनके तीन जन्मों की याद रखने की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। उनका दावा है कि उन्हें अपने पिछले दो जन्मों की हर एक घटना और स्थान पूरी तरह याद हैं।
कटनी, बांग्लादेश और टीकमगढ़ से जुड़ा है तीन जन्मों का दावा
डॉ. स्वर्णलता तिवारी के अनुसार उनका पहला जन्म वर्ष 1900 में मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इसके बाद उनका दूसरा जन्म 1940 में बांग्लादेश के सिलहट में हुआ, जहां उनका नाम कमलेश गोस्वामी था। सड़क दुर्घटना में निधन के बाद वर्ष 1948 में उनका वर्तमान जन्म टीकमगढ़ में हुआ।
बचपन से ही स्वर्णलता को अनजान स्थानों, लोगों और पुरानी घटनाओं की बातें याद आने लगी थीं। जब उन्होंने अपने परिजनों को इन बातों के बारे में विस्तार से बताया, तो कई पुराने ऐतिहासिक तथ्यों और स्थानों का मिलान किया गया। यह घटनाक्रम केवल एक पारिवारिक दावा न रहकर शोध का विषय बन गया।
अमेरिकी शोधकर्ता इयान स्टीवेंसन ने भी किया था मामले पर अध्ययन
पुनर्जन्म के इस चर्चित मामले पर भारतीय और विदेशी विशेषज्ञों ने काफी शोध किया। अमेरिका के प्रसिद्ध पैरासाइकोलॉजी शोधकर्ता प्रो. इयान स्टीवेंसन और जयपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उनके दावों की गहन जांच की। मध्य प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ. एच.पी. मिश्र ने भी इन दावों का सत्यापन कराया था, जो रिकॉर्ड से मेल खाए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक डॉ. स्वर्णलता तिवारी आज भी उन परिवारों से जुड़ी हुई हैं, जिनसे वह पिछले जन्म का रिश्ता बताती हैं। कटनी का पाठक परिवार उन्हें सम्मानपूर्वक ‘बड़ी मां’ कहता है। हालांकि, मुख्यधारा का विज्ञान पुनर्जन्म को प्रमाणित नहीं मानता, इसलिए यह मामला आज भी शोध और बहस का विषय है।