हैलोवीन फेस्टिवल पर कद्दू से डरावना चेहरा क्यों बनाते हैं, जानें जैक-ओ-लैनटर्न की हैरान करने वाली पौराणिक कथा

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London News: सनातन परंपरा में कद्दू का खास धार्मिक महत्व है, जिसे सीताफल, काशीफल और मां कूष्माण्डा से जोड़ा जाता है। वहीं पश्चिमी देशों में कद्दू का हैलोवीन से गहरा नाता है। हर साल 31 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस पर्व पर कद्दू से डरावने चेहरे यानी ‘जैक-ओ-लैनटर्न’ बनाए जाते हैं।

प्राचीन सेल्टिक संस्कृति और सौवेन त्योहार से जुड़ी परंपरा

हैलोवीन की शुरुआत लगभग दो हजार साल पहले ब्रिटेन और आयरलैंड में प्राचीन सेल्टिक लोगों के ‘सौवेन’ पर्व से हुई थी। सेल्टिक मान्यताओं के अनुसार इस खास दिन जीवित और मृत लोगों की दुनिया के बीच की सीमा धुंधली हो जाती है। इसके चलते आत्माएं पृथ्वी पर विचरण करने के लिए लौट आती हैं।

आयरिश लोककथाओं में ‘जैक-ओ-लैनटर्न’ की कहानी स्टिंजी जैक नामक एक चालाक व्यक्ति से जुड़ी है। उसने शराब के पैसे बचाने के लिए शैतान को आमंत्रित किया और उसे सिक्के में बदल दिया। जैक ने शैतान से वादा लिया कि वह मरने के बाद उसकी आत्मा को नरक में नहीं ले जाएगा।

शलजम से शुरू हुआ सफर कद्दू तक कैसे पहुंचा

मृत्यु के बाद बुरे कर्मों के कारण जैक को स्वर्ग नहीं मिला और वादे की वजह से शैतान ने नरक में प्रवेश नहीं दिया। भटकती आत्मा को रास्ता देखने के लिए शैतान ने जलता कोयला दिया, जिसे जैक ने खोखले शलजम में रख लिया। इसके बाद से बुरी आत्माओं को भगाने के लिए शलजम पर डरावने चेहरे बनाए जाने लगे।

शुरुआती दौर में आयरलैंड के लोग शलजम और आलू को तराशकर यह लालटेन बनाते थे। बाद में जब आयरिश नागरिक अमेरिका पहुंचे, तो वहां शलजम के मुकाबले कद्दू आसानी से और बड़े आकार में उपलब्ध था। तभी से हैलोवीन पर कद्दू को तराशकर डरावना जैक-ओ-लैनटर्न बनाने की विश्वव्यापी परंपरा शुरू हो गई।

Desh Raj
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