Kolkata News: पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदू अधिकारी की सरकार विधानसभा में नया बिल पेश कर सकती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि आगामी सत्र में राज्य का नाम ‘पश्चिम बंगा’ करने का प्रस्ताव आएगा।
समिक भट्टाचार्य ने बताया कि राज्य को उसके गौरवशाली इतिहास और बंगाली अस्मिता से जोड़ने के लिए यह फैसला लिया जा रहा है। पिछले 27 सालों में अलग-अलग राज्य सरकारों ने तीन बार नाम बदलने का प्रयास किया। केंद्र और राज्य में अलग दलों की सरकार होने से पहले यह काम पूरा नहीं हो सका।
बीजेपी नेता ने कहा कि नागरिकों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल’ जैसे नामों से मुक्ति मिलेगी। राज्य सरकार शीघ्र ही सदन में इस संबंध में विधेयक प्रस्तुत करेगी। इस प्रस्ताव की प्रक्रिया और रूपरेखा विधानसभा में बिल पेश होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कवायद लगभग ढाई दशक पुरानी है। वर्ष 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने विधानसभा में ‘पश्चिम बंगा’ नाम रखने की पहल की थी। उस समय प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, लेकिन केंद्र सरकार से इसे जरूरी मंजूरी नहीं मिल पाई थी।
ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद 2011 में यह विषय दोबारा चर्चा में आया। सरकार ने तब वर्णमाला क्रम में राज्य का स्थान ऊपर लाने का तर्क दिया था। इसके बाद 2016 और 2018 में विधानसभा से ‘बांग्ला’ नाम का प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन पड़ोसी देश बांग्लादेश से समानता के कारण केंद्र ने अनुमति नहीं दी।
समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में ‘पश्चिम बंगा भवन’ के निर्माण की घोषणा भी की। संस्कृति और पर्यटन विभाग कूचबिहार राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसमें कॉन्फ्रेंस रूम, लाइब्रेरी और बंगाली साहित्य का संग्रह रहेगा, जहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं को ठहरने की उत्तम सुविधा मिलेगी।