New Delhi News: सावन का पावन महीना केवल भगवान शिव की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि शनि के दुष्प्रभावों से राहत पाने का भी उत्तम समय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के दौरान हनुमान जी की विधिवत उपासना करने से शनि की साढ़े साती और ढैय्या से जुड़े कष्ट दूर होते हैं।
शिव पुराण के मुताबिक हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं। वहीं शनि देव महादेव के अनन्य शिष्य और संसार के कर्मफल दाता माने जाते हैं। जब शनि देव न्याय के दौरान अत्यधिक कठोर दंड देते हैं, तब उन्हें संतुलित रखने के लिए बजरंगबली की आराधना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
सावन के मंगलवार और शनिवार को पूजा का विशेष महत्व
सावन मास में आने वाले मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के साथ भगवान शिव, शनि देव और पीपल के वृक्ष की पूजा अत्यंत शुभ होती है। पूरी श्रद्धा से बजरंगबली की सेवा करने पर शनि ग्रह की प्रतिकूल दशा, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव के दुष्प्रभावों में बड़ी कमी आती है।
शनि दोष और दुर्भाग्य से राहत पाने के आसान उपाय
- हनुमान जी को चमेली का तेल अर्पित करने से साढ़े साती के कष्टों में शीघ्र राहत मिलती है।
- बरगद के 8 पत्तों को काले धागे में पिरोकर चढ़ाने से शनि की बाधाएं खत्म होती हैं।
- लौंग लगा मीठा पान का बीड़ा अर्पित करने से जीवन का दुर्भाग्य समाप्त होने लगता है।
- कागजी बादाम अर्पित कर आधे बादाम काले कपड़े में दक्षिण दिशा में रखने से शनि शांत होते हैं।