Varanasi News: पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ और नागों के बीच की बैर की वजह कोई युद्ध नहीं था। महर्षि कश्यप की दो पत्नियों विनता और कद्रू के बीच लगी एक शर्त और छल के कारण दोनों के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी दुश्मनी की शुरुआत हुई।
ऋषि कश्यप की पत्नियां विनता और कद्रू
महाभारत के आदि पर्व के मुताबिक प्रजापति दक्ष की पुत्रियां विनता और कद्रू का विवाह महर्षि कश्यप से हुआ था। कद्रू ने एक हजार शक्तिशाली पुत्रों की मांग की, जबकि विनता ने दो पराक्रमी पुत्र मांगे। इसके बाद कद्रू के अंडों से शेषनाग और तक्षक जैसे नाग पैदा हुए, जबकि विनता के पुत्र अरुण और गरुड़ बने।
घोड़े के रंग पर लगी शर्त
समुद्र मंथन से उच्चैःश्रवा नामक अलौकिक सफेद घोड़ा निकला। इसे देखकर कद्रू ने कहा कि घोड़े की पूंछ काली है, जबकि विनता ने उसे पूरी तरह सफेद बताया। दोनों के बीच शर्त तय हुई कि जिसका जवाब गलत होगा, वह दूसरी की दासी बनेगी। कद्रू ने छल करते हुए नागों को पूंछ पर जाकर लिपटने का आदेश दिया।
छल से हार गईं विनता
अगले दिन नागों के लिपटने की वजह से पूंछ काली दिखाई दी और विनता शर्त हार गईं। इसके बाद उन्हें कद्रू और नागों की दासी बनना पड़ा। जब गरुड़ को इस छल का पता चला, तो वे क्रोधित हुए। उन्होंने नागों से मां को आजाद करने का उपाय पूछा, जिस पर नागों ने स्वर्ग से अमृत कलश लाने की मांग की।
अमृत कलश और मां की मुक्ति
गरुड़ ने स्वर्ग पर आक्रमण करके देवों को पराजित किया और अमृत कलश ले आए। उन्होंने कलश को कुशा घास पर रखकर नागों से स्नान करने को कहा। इसी दौरान इंद्र कलश वापस ले गए। अमृत पाने की लालच में नागों ने कुशा घास को चाटा, जिससे उनकी जीभ दो हिस्सों में कट गई और तभी से बैर शुरू हुआ।