New Delhi News: संसद में पेश हुए नए संशोधन विधेयक के बाद यूपीआई और रूपे कार्ड ट्रांजेक्शन पर शुल्क लागू होने की चर्चा तेज हो गई है। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट में प्रस्तावित बदलावों से बैंकों को एमडीआर चार्ज लगाने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल पेश किया है। इसके बाद से ही डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगने की अटकलें शुरू हो गईं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सिस्टम को चलाने के लिए सस्टेनेबल फंडिंग की जरूरत होगी।
एमडीआर वह चार्ज है जो व्यापारी ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर बैंकों को देते हैं। जनवरी 2020 से यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड पर एमडीआर हटा दिया गया था। नए बदलावों से बड़े बिजनेसेज पर इसे फिर से लागू करने का कानूनी रास्ता साफ हो सकता है।
पीएमओ के मुताबिक जुलाई महीने में भारत में यूपीआई लेनदेन 23.66 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। दूसरी तरफ कांग्रेस ने निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर वसूली करके आम जनता की जेब काटने की तैयारी कर रही है।
बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि विधेयक आने पर ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन को छूट दी गई है ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। व्यापारी सुविधा मिलने पर मामूली शुल्क देने के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर आम लोग और विशेषज्ञ इस कदम की आलोचना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एमडीआर लागू होने से व्यापारी ग्राहकों को दोबारा कैश पेमेंट की ओर धकेलेंगे। इससे पिछले कुछ सालों में डिजिटल इंडिया को मिली सफलता और रफ्तार को बड़ा झटका लग सकता है।
आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में 24,000 करोड़ से ज्यादा यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए। आरबीआई के पास पर्याप्त सरप्लस फंड है जिससे यूपीआई का खर्च उठाया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यूपीआई को मुफ्त रखने से देश को कैश मैनेजमेंट में बड़ी बचत होती है।