Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया संवाद कार्यक्रम के माध्यम से देश की युवा पीढ़ी यानी जन-जी (Gen-Z) से सीधा संवाद किया। वर्चुअल रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। पीएम मोदी ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खेल इंसान को जिंदगी की चुनौतियों से मुकाबला करना सिखाते हैं।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस 15 अगस्त को मैंने लाल किले से देश के सामने भारत का स्पोर्ट्स विजन रखा। जब मैं खेलों की बात करता हूं, तो यह सिर्फ मेडल जीतने तक सीमित नहीं है। यह एक विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेल क्षमता और युवा शक्ति को एकजुट करने का अभियान है।’
पीएम मोदी ने कहा, ‘जो खेलते हैं, वे खिलते हैं और खेल में ‘खिलने’ का मतलब सिर्फ मैदान पर जीतना नहीं है। इसका मतलब है व्यक्ति और परिवार का विकास होना। साथ ही देश का मान बढ़ाना। जब कोई खिलाड़ी सफल होता है, तो वह सफलता सिर्फ उसकी नहीं होती। इससे उसके परिवार की पहचान बढ़ती है। उसके स्कूल और कॉलेज का मान बढ़ता है। उसके जिले और राज्य की पहचान मजबूत होती है। दुनिया उस शहर या राज्य को उस खिलाड़ी के नाम से पहचानने लगती है।’
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी अगुवाई में देश के भीतर युवाओं और खेलों को एक नई प्राथमिकता दी गई है। पीएम ने युवाओं को भारत का उज्ज्वल वर्तमान और भविष्य मानते हुए उन्हें ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने का काम किया है।
खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने आगे कहा, ‘पीएम मोदी आपने युवाओं को भारत का उज्ज्वल वर्तमान और भविष्य माना है। उन्हें ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प से जोड़ा है। आपकी लीडरशिप में देश ने पहली बार खेलों को सिर्फ एक गतिविधि के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर देखा है।’