Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी ने नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस विधायकों के प्रस्तावक बनने के बाद इस चुनावी मुकाबले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कांग्रेस ने रणनीति के तहत निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है। इसी क्रम में भोपाल निवासी राजकुमार लोहानी ने विधानसभा पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। लोहानी के नामांकन में कांग्रेस के कई प्रमुख विधायक प्रस्तावक के रूप में शामिल हुए।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, आतिफ अकील, अभिजीत शाह और सुरेंद्र सिंह हनी बघेल के साथ पार्टी प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी मौजूद रहे। भोपाल के पुराने शहर स्थित घोड़ा नक्कास क्षेत्र के निवासी राजकुमार लोहानी हायर सेकेंडरी तक शिक्षित हैं और मोबाइल एसेसरीज की दुकान चलाते हैं। कांग्रेस ने उनके जरिए केंद्रीय स्तर पर राजनीतिक विरोध दर्ज कराने की रणनीति बनाई है।
संख्याबल भाजपा के पक्ष में, प्रतीकात्मक विरोध की रणनीति
मध्य प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्याबल को देखते हुए मुकाबला पूरी तरह भाजपा के पक्ष में नजर आ रहा है। कांग्रेस के पास अपने दम पर जीत दर्ज करने के लिए आवश्यक विधायकों का आंकड़ा नहीं है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कांग्रेस की यह पहल मुख्य रूप से प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराने और चुनावी विमर्श को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, लेकिन कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान प्रक्रिया में शामिल न हो पाने की स्थिति के कारण प्रभावी संख्या 229 मानी जा रही है। सामान्य नियमों के तहत राज्यसभा की एकल सीट जीतने के लिए 116 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है, जो भाजपा के पास पर्याप्त अंतर से उपलब्ध हैं।
क्रॉस वोटिंग और विधायकों के रुख पर टिकी नजरें
इस उपचुनाव में बीना से विधायक निर्मला सप्रे की भूमिका को लेकर भी सियासी हलकों में चर्चाएं बनी हुई हैं। निर्मला सप्रे आधिकारिक तौर पर कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई थीं, लेकिन बीते समय से वे भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय देखी गई हैं। उनके दलबदल से जुड़े मामले और मतदान में उनके संभावित रुख को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
राजकुमार लोहानी के मैदान में उतरने से निर्विरोध निर्वाचन की संभावना समाप्त हो गई है और मुकाबला औपचारिक मतदान की स्थिति तक पहुंच गया है। अब सभी की निगाहें मतदान के दिन विधायकों की उपस्थिति और राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं।