Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए नई सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कों पर यह नीति लागू होगी। योजना, डिजाइन और निर्माण के दौरान ही सुरक्षा कमियों की पहचान कर उनका समाधान किया जाएगा।
सड़क सुरक्षा ऑडिट पांच अलग-अलग चरणों में पूरा होगा। इसमें प्रारंभिक डिजाइन, डीपीआर तैयार करने, निर्माण कार्य, सड़क खोलने से पहले और पहले से बनी सड़कों का ऑडिट शामिल है। ऑडिट में अलाइनमेंट, ज्यामितीय डिजाइन, स्ट्रीट लाइट, पैदल यात्रियों के लिए सुविधाएं और कार्यस्थल सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाएगा।
ऑडिट के लिए कड़े नियम और समर्पित रोड सेफ्टी सेल
केवल भारतीय सड़क कांग्रेस से प्रमाणित या 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्राप्त अनुभवी अधिकारी ही यह ऑडिट कर सकेंगे। ऑडिटर का प्रोजेक्ट के निर्माण से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होना चाहिए। संस्थागत व्यवस्था के लिए मुख्यालय में ‘रोड सेफ्टी सेल’ बनेगा, जबकि विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ हर तिमाही इसकी समीक्षा करेंगे।
एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली हर सड़क परियोजना में लागत का एक प्रतिशत सुरक्षा ऑडिट के लिए तय किया जाएगा। इसमें सड़क संकेतों, जेब्रा क्रॉसिंग और सुरक्षा बैरियर के भारतीय मानकों का पालन अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
सड़क हादसों और मौतों के आंकड़ों में आई गिरावट
राज्य सरकार के इन प्रयासों से हादसों में कमी आई है। वर्ष 2023 के मुकाबले 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। साल 2023 में जहां 2,253 सड़क हादसे हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 2,107 रह गई।
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का आंकड़ा भी घटा है। वर्ष 2023 में हादसों के कारण 892 लोगों की मौत हुई थी, जो 2024 में घटकर 806 रह गई। वहीं, घायलों की संख्या भी 2023 के 3,449 से कम होकर 2024 में 3,290 पर पहुंच गई है।
