Kolkata News: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गठित अपीलीय न्यायाधिकरण पोर्टल पर चुनाव आयोग ने जजों की आपत्तियों के बाद महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए हैं। अब जजों को अनिवार्य आधार-प्रमाणित ई-साइन की जगह डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही एक साथ कई आदेश अपलोड करने और अतिरिक्त दस्तावेज शामिल करने की व्यवस्था भी लागू की गई है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) के जजों की सहूलियत के लिए चुनाव आयोग ने अपने ECINET पोर्टल में कई बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। पोर्टल पर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और आधार-आधारित लॉगिन पर जजों की आपत्तियों के बाद आयोग ने अनिवार्य आधार-प्रमाणित ई-साइन की जगह डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) लागू करने का फैसला किया है। इससे पिछले एक महीने से अधिक समय से पोर्टल पर रुके हुए आदेशों को तेजी से अपलोड करने का रास्ता साफ हो गया है।
डिजिटल सिग्नेचर पेन-ड्राइव और बल्क अपलोड की सुविधा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एसआईआर ट्रिब्यूनल के जजों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए व्यवस्था में सुधार किया गया है। पूर्व में आधार प्रमाणीकरण की अनिवार्यता के चलते कई जजों ने आपत्ति दर्ज कराई थी और 21 सितंबर के बाद से पोर्टल पर कई फैसले अपलोड नहीं हो सके थे।
अब आयोग जजों को डिजिटल सिग्नेचर वाली पेन-ड्राइव उपलब्ध करा रहा है, जिसकी मंजूरी इस सप्ताह के अंत तक पूरी तरह प्रभावी होने की संभावना है। इसके अलावा पोर्टल पर अब जज एक-एक करके आदेश चढ़ाने के बजाय एक साथ कई आदेश (बल्क में) अपलोड कर सकेंगे, जिससे समय और प्रशासनिक श्रम की बचत होगी। जज अपने निर्णयों को ड्राफ्ट के रूप में भी सुरक्षित रख सकेंगे, ताकि अंतिम रूप देने से पूर्व आवश्यक संशोधन किए जा सकें।
मान्य दस्तावेजों में 14वीं श्रेणी शामिल, जजों को मिला विशेषाधिकार
अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष आने वाले मामलों के निस्तारण को व्यावहारिक बनाने के लिए चुनाव आयोग ने पोर्टल में मान्य दस्तावेजों की सूची का भी विस्तार किया है। पूर्व में निर्धारित 13 दस्तावेजों की सूची के अतिरिक्त अब ‘कोई अन्य दस्तावेज’ नाम से 14वीं श्रेणी जोड़ी गई है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि 13 दस्तावेजों की सूची केवल सांकेतिक थी। अब ट्रिब्यूनल के जज अपने न्यायिक विवेक से किसी ऐसे दस्तावेज को स्वीकार कर अपलोड करवा सकते हैं, जो किसी व्यक्ति की मतदाता सूची में शामिल होने की पात्रता तय करने के लिए उचित प्रतीत होता हो। इस तरह के दस्तावेज मतदाता स्वयं अथवा मतदाता पंजीकरण अधिकारी के माध्यम से भी पोर्टल पर प्रस्तुत कर सकेंगे।
ट्रिब्यूनल दफ्तरों के स्थानांतरण पर भी काम शुरू
तकनीकी सुधारों के साथ-साथ कार्यस्थल से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि वे ट्रिब्यूनल जजों की उस मांग पर त्वरित कार्रवाई करें, जिसमें उन्होंने अपने कार्यालयों को किसी अधिक सुगम, केंद्रीय और व्यावहारिक स्थान पर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था।